

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद अब कोलकाता की सड़कों और सड़क किनारे लगे बैरिकेड्स का रंग भी बदलता नजर आ रहा है। ईस्टर्न मेट्रोपॉलिटन बाइपास (EM Bypass) पर लंबे समय से दिखाई देने वाले नीले-सफेद बैरिकेड्स को अब पीला-काला-सफेद रंग दिया जा रहा है।
EM बाइपास पर शुरू हुआ रंग बदलने का काम
कोलकाता के प्रमुख मार्गों में शामिल ईएम बाइपास के दोनों किनारों पर लगे बैरिकेड और गार्डरेल को नए रंग में रंगने का काम तेजी से चल रहा है। इससे पहले धर्मतला इलाके में भी सड़क किनारे के बैरिकेड और डिवाइडर का रंग बदला गया था।
बाइपास के अलावा शहर के अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों में भी नीले-सफेद रंग की जगह पीला, काला और सफेद रंग दिखाई देने लगा है।
2011 के बाद शहर में आया था नीला-सफेद रंग
कोलकाता में 2011 में ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस की सरकार बनने के बाद शहर की कई सड़कों, सरकारी इमारतों, डिवाइडर और बैरिकेड्स को नीले-सफेद रंग में रंगने की शुरुआत हुई थी।
करीब 15 वर्षों तक यह रंग कोलकाता की पहचान का एक प्रमुख हिस्सा बना रहा। अब 2026 में सरकार बदलने के बाद शहर के सार्वजनिक ढांचे के रंग में भी बदलाव देखने को मिल रहा है।
पीला-काला रंग क्यों?
नए रंगों के पीछे प्रशासन की ओर से ट्रैफिक सुरक्षा से जुड़ा तर्क दिया जा रहा है। सड़क सुरक्षा में पीला और काला रंग अधिक स्पष्ट दिखाई देता है। इन दोनों रंगों के बीच ज्यादा कंट्रास्ट होने के कारण बैरिकेड, डिवाइडर और सड़क के किनारे की बाधाएं वाहन चालकों को दूर से आसानी से नजर आ सकती हैं।
देश में भी सड़क सुरक्षा से जुड़े कई स्थानों पर पीला-काला और सफेद-काला रंग इस्तेमाल किया जाता है।
एक्साइड और अन्य इलाकों में भी बदलाव
रंग बदलने का असर केवल बाइपास तक सीमित नहीं है। एक्साइड के आसपास सड़क के डिवाइडर और अन्य हिस्सों में भी पुराने नीले-सफेद रंग को बदलकर पीला-सफेद किया जा रहा है। वहीं कुछ जगहों पर सड़क किनारे के सिमेंटेड हिस्सों को पीला-काला रंग दिया जा रहा है।
मुख्य बात
कोलकाता में सड़क और सार्वजनिक ढांचे का नीला-सफेद रंग अब धीरे-धीरे पीला-काला-सफेद रंग में बदल रहा है। जहां इसे सड़क सुरक्षा और बेहतर दृश्यता से जोड़कर देखा जा रहा है, वहीं 2011 के बाद शहर की पहचान बने नीले-सफेद रंग के खत्म होने को राजनीतिक बदलाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है।