राष्ट्रपति के प्रति सीएम का बयान और व्यवहार संवैधानिक गरिमा के अनुरूप नहीं : तापस

राष्ट्रपति के प्रति व्यवहार और आदिवासी समाज के मुद्दे पर भाजपा का विरोध पत्र जारी
तापस रॉय
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कोलकाता : भाजपा ने हालिया घटनाओं को लेकर राज्य सरकार पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और आदिवासी समाज के प्रति असम्मान का आरोप लगाते हुए कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। पार्टी नेताओं ने कहा कि राष्ट्रपति के पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान जिस प्रकार की परिस्थितियां सामने आईं, उससे राज्य की परंपरागत मेहमाननवाजी और शिष्टाचार पर सवाल खड़े हुए हैं।

भाजपा के मुख्य प्रवक्ता एडवोकेट देवजीत सरकार ने कहा कि नवम संताल सम्मेलन जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम का स्थल बदले जाने और राष्ट्रपति के प्रति कथित असम्मानजनक व्यवहार ने आदिवासी समाज की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। उनका आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस के कुछ नेताओं और मंत्रियों द्वारा पहले भी राष्ट्रपति को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई हैं, जिससे लोगों में आक्रोश पैदा हुआ है।

राज्य भाजपा के उपाध्यक्ष तापस रॉय ने कहा कि मुख्यमंत्री के हालिया बयान और व्यवहार एक संवैधानिक पद की गरिमा के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल अपनी सांस्कृतिक परंपरा, शिष्टाचार और अतिथि-सत्कार के लिए जाना जाता है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में इन मूल्यों पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। उनके अनुसार, जब देश की राष्ट्रपति राज्य में आती हैं तो उनका सम्मान करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी होती है।

तापस रॉय ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग, न्यायपालिका और अन्य संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ भी कई बार अनुचित टिप्पणियां की गई हैं। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची के संशोधन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर भ्रम की स्थिति बनी है, इसलिए भाजपा ने चुनाव आयोग के समक्ष 18 सूत्रीय मांगपत्र प्रस्तुत किया है, ताकि राज्य में स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित किए जा सकें। उन्होंने राज्य में रोजगार, पारदर्शी नियुक्ति, 7वें वेतन आयोग के क्रियान्वयन और उद्योग-निवेश को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

तापस रॉय ने दावा किया कि राज्य में कई नियुक्तियां फर्जी एसटी प्रमाणपत्रों के आधार पर की गई हैं, जिससे वास्तविक आदिवासी युवाओं के अधिकारों का हनन हुआ है। उन्होंने संदेशखाली जैसी घटनाओं का भी उल्लेख किया, जहां आदिवासी महिलाओं और परिवारों पर अत्याचार के आरोप सामने आए थे, जिससे बंगाल के लोगों में गंभीर चिंता पैदा हुई है। इस संदर्भ में भाजपा की ओर से आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दों पर एक दो पृष्ठों का पंपलेट भी जारी किया गया। बताया गया कि इस पंपलेट में आदिवासी समाज के विकास, उनके अधिकारों और विभिन्न आँकड़ों से संबंधित जानकारी दी गई है।

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