क्लाइव स्ट्रीट : पूर्व की वॉल स्ट्रीट, जहां से बदली व्यापार की दिशा

कोलकाता के वित्तीय इतिहास की धड़कन
फाइल फोटो
फाइल फोटो
Published on

कोलकाता : आज की व्यस्त नेताजी सुभाष रोड को देखकर शायद ही कोई यह अंदाजा लगा पाए कि यही सड़क कभी 'वॉल स्ट्रीट ऑफ द ईस्ट' यानी पूर्व की वॉल स्ट्रीट के नाम से जानी जाती थी। ब्रिटिश काल में क्लाइव स्ट्रीट कहलाने वाली यह सड़क, न सिर्फ कोलकाता बल्कि पूरे एशिया के व्यापार और वित्तीय गतिविधियों की धुरी हुआ करती थी। बंगाल की समृद्धि, औपनिवेशिक सत्ता और वैश्विक पूंजी के प्रवाह की कहानी इसी सड़क से होकर गुज़री है। सरे राह चलते-चलते विशेष में आज सफर करते हैं उस सड़क की ओर, जहां व्यापार की धारा ने न केवल बंगाल, बल्कि पूरी दुनिया को प्रभावित किया।

बंगाल की संपन्नता ने खींचा दुनिया का ध्यान

जब दुनिया भर के व्यापारियों को भारतीय उत्पादों, विशेषकर बंगाल के वस्त्र उद्योग की समृद्धि का ज्ञान हुआ, तो वह बंगाल की खाड़ी पार कर व्यापार के लिए यहां पहुंचे। इन्हीं व्यापारिक हलचलों के बीच ईस्ट इंडिया कंपनी के सैन्य अधिकारी रॉबर्ट क्लाइव का आगमन हुआ। 1745 में चेन्नई से कोलकाता आए क्लाइव ने 1749 में कर्नाटक के युद्ध में फ्रांसीसी सेनाओं के खिलाफ लड़ाई लड़ी, जिसने आगे चलकर कोलकाता में ब्रिटिश प्रभुत्व की नींव रखी। ‘ब्लैक होल’ की घटना के छह महीने बाद, एडमिरल वॉटसन के नेतृत्व में जहाजों के साथ क्लाइव ने 2 जनवरी 1757 को नवाब सिराजुद्दौला से कोलकाता को दोबारा अपने कब्जे में लिया। इसके बाद अंग्रेज व्यापारियों के साथ-साथ अर्मेनियाई और यहूदी व्यापारी भी बड़ी संख्या में यहां आकर बसने लगे।

फाइल फोटो
फाइल फोटो

क्लाइव स्ट्रीट से नेताजी सुभाष रोड तक

आज की नेताजी सुभाष रोड को पहले क्लाइव स्ट्रीट कहा जाता था। यह सड़क टैंक स्क्वायर (बाद में डलहौजी स्क्वायर और अब बीबीडी बाग) के उत्तर-पश्चिमी कोने से उत्तर दिशा की ओर जाती है। माना जाता है कि 1757 में ओल्ड फोर्ट की घेराबंदी समाप्त करने वाले रॉबर्ट क्लाइव का निवास भी इसी इलाके में था। यही कारण है कि यह सड़क लंबे समय तक कलकत्ता के वाणिज्यिक और वित्तीय केंद्र की मुख्य धमनी बनी रही।

बैंक, बीमा और व्यापारिक दफ्तरों की कतार

क्लाइव स्ट्रीट पर एक से बढ़कर एक प्रतिष्ठित इमारतें स्थापित हैं। गिलैंडर हाउस ग्रैहम बिल्डिंग और क्लाइव बिल्डिंग्स जैसी इमारतें उस दौर की आर्थिक शक्ति की साक्षी हैं। सड़क के एक सिरे पर रॉयल एक्सचेंज बिल्डिंग बनी, जो पहले न्यू ओरिएंटल बैंक कॉरपोरेशन की साइट पर स्थित थी। बंगाल चेंबर ऑफ कॉमर्स ने 1893 में इसका अधिग्रहण किया। इंडिया एक्सचेंज प्लेस पर लॉ बिल्डिंग, अलाहाबाद बैंक बिल्डिंग, चार्टर्ड बैंक बिल्डिंग और जेम्स फिनले एंड कंपनी जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं ने इस सड़क को व्यापार का गढ़ बनाया। पास ही स्थित राइटर्स बिल्डिंग ने प्रशासन और व्यापार के बीच सीधा संबंध स्थापित किया। भले ही समय और नाम बदल गए हों, लेकिन यह सड़क आज भी व्यावसायिक गतिविधियों से गुलजार है। क्लाइव स्ट्रीट केवल एक सड़क नहीं, बल्कि वह मंच थी जहां भारतीय व्यापारियों और ब्रिटिश कंपनियों ने मिलकर ऐसे आर्थिक प्रयोग किए, जिन्होंने पूरी दुनिया के व्यापारिक इतिहास को प्रभावित किया।

संबंधित समाचार

No stories found.

कोलकाता सिटी

No stories found.

खेल

No stories found.
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in