CISF की बड़ी डिजिटल छलांग

2.2 लाख जवानों के लिए 'डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन' (DIC) के साथ किया ऐतिहासिक समझौता
CISF की बड़ी डिजिटल छलांग
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अब एक ही क्लिक पर होंगे सारे काम; 40 से अधिक इन-हाउस ऐप्स को जोड़कर बनेगा एक सुरक्षित, स्मार्ट और 'पेपरलेस' आईटी सिस्टम

सन्मार्ग संवाददाता

नई दिल्ली : देश के महत्वपूर्ण औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में दिन-रात मुस्तैद रहने वाले केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवानों के लिए एक बेहतरीन खबर है। जवानों के रोजमर्रा के प्रशासनिक कामों को पूरी तरह 'पेपरलेस', पारदर्शी और मोबाइल पर 24 घंटे सुलभ बनाने के लिए CISF ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत आने वाले 'डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन' (DIC) के साथ एक अहम समझौता (MoU) किया है।

इस दो वर्षीय आधुनिकीकरण योजना के तहत, DIC बल के मौजूदा आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने के लिए एक 'रणनीतिक प्रौद्योगिकी भागीदार' (Strategic Technology Partner) के रूप में काम करेगा।

यह ऐतिहासिक समझौता CISF के महानिदेशक श्री प्रवीर रंजन (IPS) और DIC के प्रबंध निदेशक एवं सीईओ श्री अखिल कुमार (IPS) की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। समझौते पर CISF की ओर से आईजी (तकनीक) श्रीमती सोनिया नारंग और DIC की ओर से मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी श्री देवव्रत नायक ने हस्ताक्षर किए।

डिजिटाइजेशन में पहले से ही अग्रणी है CISF: देश के सभी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) में CISF ने हमेशा तकनीक के मामले में लीड किया है। बल ने जवानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 40 से अधिक इन-हाउस ऐप्स और 30 से अधिक मॉड्यूल खुद तैयार किए हैं। इनमें शामिल हैं:

- ई-कार्यालय (e-Karyalay): इसके जरिए अधिकारी 24/7 कहीं से भी फाइलें और डाक निपटा सकते हैं, जिससे फाइलों का बोझ कम हुआ है।

- ई-ग्रीवांस (e-Grievance): जवानों की शिकायतें सीधे उच्च स्तर तक पहुंचाने वाले इस पोर्टल ने सितंबर 2016 से अब तक दर्ज 55,046 में से 53,043 शिकायतों का सफलतापूर्वक समाधान किया है।

- ई-अनुरोध (e-Anurodh) व ई-सर्विस बुक: जवान अब छुट्टी, वीकली ऑफ या ड्यूटी में बदलाव जैसी 40-50 तरह की अर्जियां बिना किसी कागजी कार्यवाही के सीधे मोबाइल से भेज सकते हैं।

इनके अलावा आयुष्मान, मेस फीडबैक, वेलफेयर लोन और डीजी स्कॉलरशिप जैसे पोर्टल्स ने जवानों की जिंदगी बेहद आसान कर दी है। अकेले 'लीव मैनेजमेंट सिस्टम' ने लॉन्च से अब तक 95 लाख से ज्यादा ट्रांजैक्शन पूरे किए हैं।

अब क्या बदलेगा? (समझौते की जरूरत और फायदे) भले ही ये सारे सिस्टम शानदार काम कर रहे हैं, लेकिन इन्हें समय-समय पर अलग-अलग बनाया गया था। महानिदेशक, CISF का विजन था कि इन सभी पोर्टल्स को आपस में जोड़ा जाए ताकि एक 'इंटीग्रेटेड, क्लाउड-रेडी और सुरक्षित' सिस्टम बन सके।

अगले दो सालों में तीन चरणों में होने वाले इस अपग्रेडेशन से सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि जवानों को अलग-अलग पोर्टल पर अपनी जानकारी बार-बार नहीं भरनी होगी। सब कुछ एक जगह जुड़ेगा, लाइव ट्रैकिंग होगी और मोबाइल पर ऑटोमेटेड अलर्ट मिलेंगे। वहीं वरिष्ठ अधिकारियों को भी हाथ से बनी रिपोर्ट की जगह 'रियल-टाइम डैशबोर्ड' मिलेगा, जिससे वे मैनपावर, ट्रेनिंग और संसाधनों की सटीक प्लानिंग कर सकेंगे। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान बल की मौजूदा डिजिटल सेवाएं बिना किसी रुकावट के चलती रहेंगी।

साइबर सुरक्षा सर्वोपरि: डेटा पर CISF का ही रहेगा पूरा नियंत्रण चूंकि यह देश के एक प्रमुख सुरक्षा बल का मामला है, इसलिए डेटा की सुरक्षा सबसे अहम है। DIC अपनी विशेषज्ञता से सिस्टम को साइबर हमलों से सुरक्षित बनाएगा। हालांकि, यह स्पष्ट किया गया है कि पूरे डेटा का स्वामित्व और नियंत्रण पूरी तरह CISF के पास ही रहेगा। सारा काम CISF की ही तकनीकी टीम करेगी, जबकि DIC उन्हें अत्याधुनिक तकनीक, ट्रेनिंग और मार्गदर्शन (Knowledge Transfer) प्रदान करेगा।

नेतृत्व का विजन इस मौके पर महानिदेशक, CISF श्री प्रवीर रंजन ने कहा, "हमारी इन-हाउस टीमों ने ऐसे शानदार डिजिटल सिस्टम बनाए हैं जिनका बल का हर सदस्य रोज इस्तेमाल करता है। अब अगला कदम इन सबको एक साथ जोड़ना है ताकि जवानों का समय कागजी कार्यवाही में न बीते और अधिकारियों को सही समय पर सटीक जानकारी मिले। DIC की मदद से हम अपने डेटा को पूरी तरह अपने नियंत्रण में रखते हुए प्रशासन को और भी तेज, पारदर्शी और जवानों के प्रति जवाबदेह बनाएंगे।"

वहीं, DIC के MD और CEO श्री अखिल कुमार ने कहा, "CISF ने अपने दम पर एक बेहद मजबूत डिजिटल नींव रखी है, जो हर साल लाखों ट्रांजैक्शन संभालती है। हम इन सिस्टम्स को आपस में जोड़ने, इनकी साइबर सुरक्षा बढ़ाने और इन्हें भविष्य के लिए तैयार करने में CISF की मदद करेंगे। यह समझौता भारत सरकार के 'डिजिटल इंडिया' विजन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।"

जैसे-जैसे साइबर खतरे बढ़ रहे हैं, देश के अहम बुनियादी ढांचे की सुरक्षा करने वाले बल के लिए एक सुरक्षित और एकीकृत आईटी सिस्टम अब कोई विकल्प नहीं, बल्कि एक बड़ी जरूरत बन गया है। यह साझेदारी CISF को एक ऐसा अभेद्य 'साइबर-रेडी' सिस्टम देगी जो बल के हर जवान को सशक्त बनाएगा।

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