बचपन की जिद ने बनाया RSETI ट्रेनर, पति का मिला भरपूर सहयोग

संघर्ष से सफलता तक की प्रेरक कहानी कई युवतियों को दे रही हैं ट्रेनिंग कई सरकारी योजनाओं के तहत ले चुकी हैं लोन
सुभद्रा नाईया युवतियों को ट्रेनिंग देती हुईं
सुभद्रा नाईया युवतियों को ट्रेनिंग देती हुईं
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रामबालक, सन्मार्ग संवाददाता

सोनारपुर : कहते हैं कि जब कोई महिला मन में ठान ले तो पहाड़ भी सर पर उठा लेती है। ऐसी ही सफलता की एक प्रेरक गाथा है सोनारपुर खुड़ीगाछी निवासी सुभद्रा नाईया (43) की, जिन्होंने बचपन की जिद को हकीकत में बदलकर न सिर्फ खुद को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि अन्य महिलाओं के जीवन को भी संवारा।

RSETI से प्रशिक्षण लेकर सुभद्रा बनीं आत्मनिर्भर, अब 18 युवतियों को दे रहीं कस्टम ज्वेलरी बनाने की ट्रेनिंग

सोनारपुर के राजपुर के दक्षिण 24 परगना रूरल सेल्फ इंप्लायमेंट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (RSETI) से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद सुभद्रा अब जिले के दूरदराज इलाकों की 18 युवतियों को कस्टम ज्वेलरी और रॉ मैटेरियल बनाने की ट्रेनिंग दे रही हैं। इन युवतियां ट्रेनिंग पूरी करने के बाद अपने पैरों पर खड़ी होकर स्वयं का व्यवसाय शुरू कर सकेंगी। सुभद्रा कहती हैं, ''RSETI ने मेरी सफलता में अहम भूमिका निभायी। आज मैं न सिर्फ खुद आत्मनिर्भर हूं, बल्कि कई युवतियों को रोजगार देकर उनके जीवन को नयी दिशा दे रही हूं।''

भविष्य क्रेडिट कार्ड स्कीम से मिला सहारा, ‘सृष्टिश्री’ यूनिट के जरिये बनीं सफल उद्यमी

ट्रेनिंग के बल पर सुभद्रा ने पश्चिम बंगाल सरकार की भविष्य क्रेडिट कार्ड स्कीम के तहत 5 लाख रुपये का लोन हासिल किया और अपना यूनिट स्थापित किया। सोनारपुर ब्लॉक कार्यालय परिसर में 'सृष्टिश्री' काउंटर खोल चुकी हैं, जिसका उद्घाटन हाल ही में दक्षिण 24 परगना जिला परिषद की नारी एवं शिशु कल्याण विभाग की कर्माध्यक्ष शची नस्कर ने किया। दुर्गापूजा से ठीक पहले अलीपुर जिला परिषद भवन में लगायी गयी साड़ी की छोटी स्टॉल से उन्होंने बंपर कमाई की।

अब महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की दे रहीं प्रेरणा

पति का सहयोग इस यात्रा में हमेशा साथ रहा। सुभद्रा बताती हैं कि ट्रेलरिंग सीखने की ललक ने उन्हें ट्रेनर बना दिया। अब वे अन्य महिलाओं को संदेश देती हैं: ''घर बैठी महिलाएं और लड़कियां ट्रेनिंग लेकर रोजगारोन्मुखी बनें। लेदर के टुकड़ों से रॉ मैटेरियल बनाने जैसे व्यवसाय में ज्यादा पूंजी की जरूरत नहीं पड़ती।'' एक छोटे कदम से शुरू हुई यह यात्रा आज बड़ी क्रांति बन चुकी है, जो सैकड़ों महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।

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