

सन्मार्ग संवाददाता
हावड़ा : दुनिया चमत्कार को नमस्कार करती है।आदमी को अपने पुरुषार्थ पर विश्वास करना चाहिए न कि चमत्कार पर। जीवन में प्रतिकूलता आए तो प्रभु के चरणों में शरणागत होकर उनके नाम को स्मरण करना चाहिए। भगवान शंकर उमा से कहते हैं ,यह संसार कर्म प्रधान है, जैसा व्यक्ति कर्म करता है उसको वैसा फल मिलता है। हम कर्म करें ,यदि उसके अनुरूप फल न मिले तो रामजी की इच्छा समझें, किसी को दोष नहीं देना चाहिए। जिनकी भृकुटि के संकेत से सृष्टि की उत्पत्ति, पालन व संहार होता है, उस भगवान पर विश्वास करो।
जो भाग्य लिखा है,उसे सहो। अपने जीवन को परमात्मा को समर्पित कर दो। भक्त का यही लक्षण है। भक्त भगवान से कुछ नहीं मांगता है।यदि मांगता तो सिर्फ भगवान से भगवान को मांगता है। संसार से जीव जुड़ा होता है,इसलिए वह चमत्कार पर भरोसा करता है। कलयुग में वे भाग्यशाली हैं,जो भगवान के भक्त हैं। नरसी मेहता के जीवन में भगवान 52बार आ सकते हैं तो आपके जीवन क्यों नहीं? आवश्यकता है ,आर्त्त भाव से उन्हें स्मरण करो। हम अपने मन को जगत से जोड़ते हैं जबकि भक्त जगदीश से।
जिस भक्त -साधक को रामजी से प्रेम होता है तो रामजी भी उससे प्रेम करते हैं। साधक की यही सफलता है, रामजी उससे प्रेम करने लगे। ये बातें रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष में सुन्दरकाण्ड भक्त मण्डल, कोलकाता के तत्वावधान में श्रीराम कथा पर प्रवचन करते हुए परम पूज्य संत मुरलीधर महाराज ने हनुमंतधाम (फोरशोर रोड,शिवपुर) में कही। कार्यक्रम का संचालन भागवत मर्मज्ञ हरीश तिवाड़ी ने किया।
श्रीरामकथा को सफल बनाने में कथा के संरक्षक श्याम सुन्दर अग्रवाल, मुख्य यजमान आशाराम झंवर व संदीप गुप्ता , दैनिक यजमान जय प्रकाश तापड़िया, वृजमोहन गट्टानी , संस्था के अध्यक्ष पवन कुमार ताम्बी, सचिव शिवशंकर लाहोटी, श्रीराम कथा आयोजन समिति के अध्यक्ष श्याम सुन्दर तोषनीवाल, सचिव ललित कुमार सिंघी, राम अवतार बिहानी, महावीर खंडेलवाल,विनोद शर्मा, जगत चोरड़िया, गजानंद दायमा, सांवरमल पारीक,चम्पालाल राठी,उमापति कुशवाहा ,महावीर प्रसाद मावतवाल,कैलाश चंद्र शर्मा सहित अन्य सदस्य सक्रिय है।इस अवसर पर गोविन्द सारडा,शांता सारडा, दुर्गा व्यास,गोविन्दराम अग्रवाल, महावीर प्रसाद बजाज, हर्ष वर्धन सर्राफ , नटवर बंग, सुरेश गाड़ोदिया , सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।