म्यांमार साइबर स्लैव: उत्तर बंगाल में तीन एजेंटों की तलाश तेज

सिलीगुड़ी, दार्जिलिंग और कर्सियांग में सीसीडब्ल्यू के अधिकारी कर रहे हैं छापामारी
फाइल फोटो
फाइल फोटो
Published on

कोलकाता: साइबर क्राइम विंग की एक विशेष टीम उत्तर बंगाल में सक्रिय तीन एजेंटों को पकड़ने के लिए दार्जिलिंग, कर्सियांग और सिलीगुड़ी में लगातार अभियान चला रही है। इन तीनों रणवीर शर्मा, लकपा शेरपा और लागेल शेरपा पर आरोप है कि उन्होंने भारतीय युवाओं को फर्जी नौकरी के लालच में म्यांमार भेजा, जहां उन्हें बंधुआ मजदूर जैसी परिस्थितियों में साइबर ठगी करने के लिए मजबूर किया जाता था।

गुजरात से पकड़ा गया साइबर स्लैव बनाने वाले गिरोह का मास्टरमाइंड

गुजरात के गांधीनगर से कथित मास्टरमाइंड नीलेश पुरोहित उर्फ नील की गिरफ्तारी के बाद यह अभियान और तेज हुआ है। सीसीडब्ल्यू की एफआईआर में पुरोहित को एक ऐसे भर्ती नेटवर्क का संचालक बताया गया है, जो सोशल मीडिया और जॉब पोर्टल्स के माध्यम से युवाओं को ‘अंतरराष्ट्रीय आईटी जॉब’ का झांसा देकर फंसाता था। विदेश पहुंचने पर पीड़ितों को सशस्त्र सुरक्षा वाले स्कैम हब्स में कैद कर दिया जाता था और उनसे भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य पूर्व में लोगों को धोखा देने का काम कराया जाता था। पुलिस के अनुसार, पुरोहित देश से भागने की कोशिश कर रहा था, तभी उसे पांच सहयोगियों के साथ गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उत्तर बंगाल के तीनों सब-एजेंटों के नाम सामने आते ही सीसीडल्यू टीम तुरंत पहाड़ी इलाकों में सक्रिय हो गयी। एक वरिष्ठ सीसीडब्ल्यू अधिकारी ने कहा, ‘हमारी टीम के पास महत्वपूर्ण सुराग हैं। ये एजेंट कई जिलों में सक्रिय रहे हैं और उम्मीद है कि जल्द ही गिरफ्तार होंगे।’

सोशल मीडिया पर लुभावने विज्ञापन देकर फंसाते थे जाल में

जांच में सामने आया है कि ये एजेंट भारत के अलावा नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका, फिलीपींस, पाकिस्तान, नाइजीरिया, मिस्र, कैमरून और ट्यूनीशिया के कमजोर वर्ग के लोगों को भी इस अंतरराष्ट्रीय ठगी नेटवर्क में खींच रहे थे। सोशल मीडिया के आकर्षक विज्ञापन और फर्जी जॉब ऑफर इनके मुख्य हथियार थे। म्यांमार के म्यावाडी स्थित कुख्यात केके पार्क में पिछले महीने मिलिशिया की बड़ी कार्रवाई के बाद इस वैश्विक तस्करी नेटवर्क का खुलासा हुआ। करीब 150 इमारतों वाले इस स्कैम हब से 9,551 विदेशी नागरिक मुक्त कराए गए, जिनमें अस्पताल, डॉर्मेट्री और रिक्रिएशन सेंटर भी शामिल थे। अंतरराष्ट्रीय रेस्क्यू प्रयासों के तहत भारत ने 6 नवंबर को 270 और 10 नवंबर को 197 नागरिकों को वापस लाया। इस महीने कुल 467 भारतीय सुरक्षित लौटे, जिनमें 42 बंगाल के हैं। कई पीड़ितों ने जांचकर्ताओं को म्यांमार के अंदर अमानवीय स्थितियों और भर्ती प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी दी है। पुलिस के मुताबिक, पुरोहित हर ट्रैफिक्ड व्यक्ति से 2 लाख से 4 रुपये लाख तक कमाता था, जबकि सब-एजेंटों को प्रति भर्ती 60 हजार से 1 लाख रुपये मिलते थे। सीस़ीडब्ल्यू के अधिकारियों ने बताया कि लौटे पीड़ितों के बयान, डिजिटल डेटा और केंद्रीय एजेंसियों के इनपुट के आधार पर गहन जांच जारी है।


संबंधित समाचार

No stories found.

कोलकाता सिटी

No stories found.

खेल

No stories found.
logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in