बंगाल की दुर्गा प्रतिमा का स्थायी ठिकाना बना कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी म्यूजियम

‘कैम्ब्रिज गॉडेस’ के नाम से मिली पहचान
Kolkata
‘कैम्ब्रिज गॉडेस’
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कोलकाता : बंगाल की दुर्गा पूजा की परंपरा अब कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के संग्रहालय में भी अपनी खास पहचान बना रही है।

करीब एक दशक से University of Cambridge के Museum of Archaeology and Anthropology में संरक्षित दुर्गा प्रतिमा को संग्रहालय के कर्मचारी प्यार से ‘The Cambridge Goddess’ कहते हैं। यह प्रतिमा अब संग्रहालय में स्थायी रूप से प्रदर्शित की जा रही है।

कैम्ब्रिज की बंगाली संस्था से जुड़ी है प्रतिमा

यह प्रतिमा कैम्ब्रिज में रहने वाले बंगालियों की संस्था Indian Cultural Society (ICS) द्वारा आयोजित दुर्गा पूजा में स्थापित की गई थी। ICS में मुख्य रूप से कैम्ब्रिज में पढ़ाने या पढ़ने वाले बंगाली लोग शामिल हैं।

संस्था इस वर्ष दुर्गा पूजा आयोजन के 25वें वर्ष में प्रवेश कर रही है और इसी मौके पर वह कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के साथ एक और संरक्षण परियोजना पर सहयोग की संभावना तलाश रही है।

विसर्जन की व्यवस्था नहीं, इसलिए खोजा गया नया रास्ता

करीब 10 साल पहले ICS के सदस्यों ने नई दुर्गा प्रतिमा बनाने का फैसला किया। इसके बाद पुरानी प्रतिमा के भविष्य को लेकर सवाल उठा। ब्रिटेन में भारत की तरह प्रतिमा के पारंपरिक विसर्जन की व्यवस्था नहीं है।

नदी में प्रतिमा विसर्जित करना प्रदूषण की दृष्टि से भी उचित नहीं माना जाता। ऐसे में संस्था के युवा सदस्यों ने प्रतिमा को किसी अन्य पूजा समिति को देने की जगह उसे सांस्कृतिक धरोहर के रूप में सुरक्षित रखने का विकल्प तलाशना शुरू किया।

इसी क्रम में Cambridge University से संपर्क किया गया। विश्वविद्यालय ने प्रतिमा को स्थायी रूप से एक धरोहर के प्रतीक के रूप में सुरक्षित रखने पर सहमति दी। हालांकि प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से संग्रहालय तक पहुंचाने की प्रक्रिया में काफी योजना और लॉजिस्टिक तैयारियों की जरूरत पड़ी। इसके बाद इसे संग्रहालय में स्थापित कर दिया गया।

कुम्हारटोली की कला और बंगाली विरासत का प्रतिनिधित्व

संग्रहालय के मानवशास्त्र विभाग के वरिष्ठ क्यूरेटर ने प्रतिमा को पश्चिम बंगाल की भक्ति परंपरा और 21वीं सदी में कुम्हारटोली के कलाकारों की कला का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया। उनके अनुसार, यह प्रतिमा केवल कोलकाता, बंगाल या हिंदू परंपरा का प्रतिनिधित्व नहीं करती, बल्कि कैम्ब्रिज में मौजूद जीवंत दक्षिण एशियाई विरासत को भी सामने लाती है।

अब यह प्रतिमा संग्रहालय की मुख्य मानवशास्त्र गैलरी में स्थायी रूप से प्रदर्शित है। संग्रहालय के मुताबिक, इसे देखने आने वाले लोगों में काफी रुचि पैदा हुई है और कई आगंतुक इस प्रतिमा के पीछे की संस्कृति और परंपरा के बारे में जानना चाहते हैं। इसी लोकप्रियता के चलते संग्रहालय कर्मचारियों ने इसे स्नेहपूर्वक ‘कैम्ब्रिज गॉडेस’ नाम दिया है।

खास बात यह है कि कोलकाता की कुम्हारटोली में बनी दुर्गा प्रतिमा आज हजारों किलोमीटर दूर कैम्ब्रिज में बंगाल की कला, दुर्गा पूजा और सांस्कृतिक विरासत की स्थायी प्रतिनिधि बन चुकी है।

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