कामकाजी महिलाओं की ताकत और संघर्ष को समर्पित फोटो प्रदर्शनी

कामकाजी महिलाओं की ताकत और संघर्ष को समर्पित फोटो प्रदर्शनी
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सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : भारत की कामकाजी महिलाओं के जीवन और उनके श्रम को समर्पित एक प्रभावशाली फोटो प्रदर्शनी Blurring of the Margins – Women at Work का उद्घाटन Kolkata Centre for Creativity में हुआ। पत्रकार और विजुअल स्टोरीटेलर Kounteya Sinha द्वारा तैयार की गई यह दो दिवसीय प्रदर्शनी देश की उन महिलाओं के जीवन को सामने लाती है, जिनका श्रम चुपचाप भारत की अर्थव्यवस्था को सहारा देता है। उद्घाटन समारोह में कलाकारों, सांस्कृतिक हस्तियों और विचारकों की प्रेरणादायक उपस्थिति देखने को मिली।

कई महीनों तक भारत के विभिन्न हिस्सों की यात्रा कर तैयार की गई इस प्रदर्शनी में अलग-अलग पेशों और परिस्थितियों में काम करने वाली महिलाओं को दर्शाया गया है। कश्मीर, केरल, बस्तर और बंगाल जैसे क्षेत्रों से लेकर खेतों में काम करने वाली मजदूरों, मछुआरों, कारीगरों, खिलाड़ियों और प्रशासकों तक—इन तस्वीरों में रोज़मर्रा के श्रम की लय और महिलाओं की शांत लेकिन मजबूत दृढ़ता को दर्शाया गया है।

यह प्रदर्शनी कलाकार और परोपकारी Jitavati Das के सहयोग से तैयार की गई है और इसका क्रिएटिव निर्देशन क्यूरेटर Oiendrila Ray Kapur ने किया है। क्यूरेशन के माध्यम से गैलरी को एक ऐसे अनुभवात्मक (इमर्सिव) स्पेस में बदला गया है जो महिलाओं के घरेलू और कार्यस्थल के जीवन की झलक देता है। तस्वीरों को इस तरह प्रस्तुत किया गया है कि वे महिलाओं के दैनिक जीवन की दिनचर्या और वातावरण को दर्शाती हैं।

जितावती दास ने कहा, “यह प्रदर्शनी उन वर्षों के अनुभव से प्रेरित है जब हमने ग्रामीण कारीगरों और महिलाओं द्वारा संचालित अनौपचारिक अर्थव्यवस्था के साथ काम किया। भारत की आर्थिक और सांस्कृतिक संरचना में महिलाओं का श्रम गहराई से जुड़ा हुआ है, फिर भी इसका बड़ा हिस्सा अक्सर दिखाई नहीं देता। इस पहल के जरिए हम महिलाओं के काम को नई पहचान देना चाहते हैं और इन कहानियों को सामने लाना चाहते हैं।”

फोटोग्राफर कौंतेय सिन्हा के कैमरे के जरिए दर्शकों को कई ऐसे पल देखने को मिलते हैं जो निजी होने के साथ-साथ सार्वभौमिक भी लगते हैं—जैसे करघे पर काम करती एक बुनकर, पास बैठा उसका बच्चा; कढ़ाई करती एक कारीगर; या खुले आसमान के नीचे साथ काम करती महिला मजदूरों का समूह। हर तस्वीर में सिर्फ काम ही नहीं, बल्कि गरिमा, कौशल और धैर्य की झलक दिखाई देती है।

सिन्हा ने कहा, “इस प्रदर्शनी की हर तस्वीर काम, संघर्ष और गर्व की कहानी है। देश के अलग-अलग हिस्सों की यात्रा के दौरान मैंने देखा कि महिलाएँ कितनी ताकत और गरिमा के साथ अपनी जिम्मेदारियाँ निभाती हैं। खेतों, कार्यशालाओं या घरों में उनका श्रम ही समुदायों और अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाता है।”

उद्घाटन समारोह में सिनेमा, संस्कृति और कूटनीति से जुड़ी कई प्रमुख हस्तियाँ मौजूद थीं। इनमें Nishtha Satyam, अभिनेत्री Divya Dutta, थिएटर कलाकार Lillete Dubey, निर्देशक Anuparna Roy, दक्षिण भारतीय अभिनेत्री Shanthipriya, टेबल टेनिस खिलाड़ी Mouma Das, Yatindra Mohan Pratap Mishra और मॉडल Ushoshi Sengupta शामिल थे।

अपने मूल में यह प्रदर्शनी यह याद दिलाती है कि भारत की प्रगति की कहानी उन महिलाओं से अलग नहीं है जो हर दिन इसे आकार देती हैं—अक्सर चुपचाप और बिना किसी पहचान के। प्रभावशाली तस्वीरों और विचारपूर्ण क्यूरेशन के माध्यम से यह प्रदर्शनी इन अनसुनी कहानियों और आवाज़ों को केंद्र में लाने का प्रयास करती है।

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