

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद अब राज्य की पहचान से जुड़े चर्चित ‘बिस्व बांग्ला’ स्टोरों की ब्रांडिंग बदलने की तैयारी है। भाजपा सरकार इन स्टोरों का नाम बदलकर ‘पश्चिम बंग’ करने की योजना बना रही है। इसके साथ ही नया लोगो भी जारी किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, नई ब्रांडिंग आने वाले कुछ हफ्तों में सामने आ सकती है।
कई स्टोरों से हटाया गया ‘बिस्वा बांग्ला’ का लोगो
सरकारी सूत्रों के अनुसार, कई स्टोरों से ‘बिस्व बांग्ला’ का लोगो हटाया जा चुका है, जबकि कुछ दुकानों पर पुराने लोगो को स्टिकर से ढक दिया गया है। नई ब्रांडिंग लागू होने के बाद पैकेजिंग में भी बदलाव करना होगा। स्टोर से जुड़े कर्मचारियों को इस संबंध में आंतरिक सूचना मिलने की बात कही गई है।
हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों की रही है खास पहचान
‘बिस्व बांग्ला’ की शुरुआत 16 सितंबर 2013 को हुई थी। इसे तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस सरकार की पहल के तौर पर विकसित किया गया था। इन स्टोरों के जरिए बंगाल के कारीगरों और बुनकरों के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराया जाता रहा है।
यहां हथकरघा साड़ियां, कांथा कढ़ाई, बालूचरी सिल्क, डोकरा कला के उत्पाद, चाय और मिठाइयों समेत बंगाल की पारंपरिक वस्तुएं मिलती हैं। समय के साथ ये स्टोर दूसरे राज्यों से आने वाले पर्यटकों और प्रवासी भारतीयों के बीच भी लोकप्रिय हुए।
कोलकाता में हैं नौ स्टोर
कोलकाता में इसके पार्क स्ट्रीट, दक्षिणापन, एयरपोर्ट, सिटी सेंटर साल्ट लेक और अलीपुर जेल म्यूजियम समेत नौ स्टोर हैं। इसके अलावा नयी दिल्ली, दार्जिलिंग और बागडोगरा में भी इसके आउटलेट संचालित होते हैं।
सरकार द्वारा ‘बिस्व बांग्ला’ के लोगो को अन्य सरकारी प्लेटफॉर्म और सार्वजनिक ढांचे से हटाने की प्रक्रिया भी पहले शुरू की जा चुकी है। सरकारी पोर्टल ‘एगिये बांग्ला’ पर भी पुराने लोगो की जगह राष्ट्रीय प्रतीक चिह्न लगाया गया है।
‘बिस्व बांग्ला’ का लोगो पहले भी राजनीतिक विवाद में रहा है। वर्ष 2017 में भाजपा के तत्कालीन विधायक मुकुल रॉय ने इसके स्वामित्व को लेकर सवाल उठाए थे, हालांकि इस आरोप से अभिषेक बनर्जी ने इनकार किया था।