बांग्ला में शोधपत्र की परंपरा फिर शुरू करेगी साइंस कांग्रेस

मातृभाषा में विज्ञान शोध को मिलेगा नया मंच
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कोलकाता : विज्ञान को आम लोगों तक मातृभाषा में पहुंचाने की दिशा में पश्चिमबंग साइंस कांग्रेस एक नई पहल करने जा रही है। राज्य के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री कल्याण चक्रवर्ती ने घोषणा की कि साइंस कांग्रेस में एक बार फिर बांग्ला भाषा में शोधपत्र प्रस्तुत करने और पढ़ने की परंपरा शुरू की जाएगी।

सूत्रों के अनुसार, मंत्री ने कहा कि विज्ञान तभी समाज में व्यापक रूप से स्वीकार्य और लोकप्रिय बन सकता है, जब उसे लोगों की अपनी भाषा में समझाया जाए। उन्होंने बताया कि पहले विश्वविद्यालयों और विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में बंगला में शोधपत्र प्रस्तुत करने की परंपरा थी, लेकिन समय के साथ यह लगभग समाप्त हो गई। अब इसे पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया गया है।

कल्याण ने कहा कि मातृभाषा में विज्ञान लेखन और शोध को बढ़ावा मिलने से विद्यार्थियों के साथ-साथ आम लोगों में भी वैज्ञानिक सोच और विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ेगी। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिक अनुसंधान और संवाद का प्रमुख माध्यम अंग्रेजी ही है, इसलिए वैश्विक प्रतिस्पर्धा को देखते हुए अंग्रेजी का महत्व भी बना रहेगा।

राज्य सरकार का मानना है कि इस पहल से बंगला भाषा में वैज्ञानिक साहित्य समृद्ध होगा और विज्ञान को आम जनता से जोड़ने के प्रयासों को नई गति मिलेगी।

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