बरानगर–बैरकपुर मेट्रो : 12.5 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर प्रस्तावित

प्रारंभिक लागत लगभग 2,069 करोड़ रुपये आंकी गई
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मेघा, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : करीब 16 वर्षों से लंबित बरानगर–बैरकपुर मेट्रो कॉरिडोर को आखिरकार नई गति मिलने की उम्मीद जगी है। वर्ष 2010 में स्वीकृत इस महत्वाकांक्षी परियोजना को फिर से शुरू करने के लिए रेलवे बोर्ड और संबंधित एजेंसियों ने प्रयास तेज कर दिए हैं। लंबे समय से अटकी इस परियोजना की सबसे बड़ी बाधा मानी जा रही भूमिगत जलापूर्ति पाइपलाइनों को हटाने पर अब गंभीर स्तर पर चर्चा हो रही है। प्रस्तावित 12.5 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड मेट्रो कॉरिडोर, जिसे कोलकाता मेट्रो की पिंक लाइन के रूप में विकसित किया जाना है, बरानगर से बैरकपुर तक 11 स्टेशनों के माध्यम से उत्तर कोलकाता और आसपास के क्षेत्रों को जोड़ेगा। इस बारे में परिवहन मंत्री अर्जुन सिंह ने कहा कि प्रारंभिक लागत लगभग 2,069 करोड़ रुपये आंकी गई थी। परियोजना का कार्य वर्ष 2011 में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार होने के बावजूद शुरू नहीं हो सका। इसकी मुख्य वजह बी.टी. रोड के नीचे बिछी 60 और 42 इंच व्यास की प्रमुख जलापूर्ति पाइपलाइनें थीं, जो पालता जल शोधन संयंत्र से टाला जलाशय तक पानी पहुंचाती हैं और उत्तर व मध्य कोलकाता के बड़े हिस्से को पेयजल उपलब्ध कराती हैं। हालांकि इसे लेकर इलाके के विधायक कौस्तव बागची ने सन्मार्ग से कहा कि पेयजल की समस्या का समाधान वे जल्द करेंगे। इसके लिए वे पूरे हिस्से का निरीक्षण कर उस पर जो कार्य करने हैं, वे करेंगे। सूत्रों के अनुसार, हाल में रेल विकास निगम लिमिटेड और कोलकाता नगर निगम के अधिकारियों के बीच बैठक हुई, जिसमें पाइपलाइनों को सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित करने और परियोजना को आगे बढ़ाने के विकल्पों पर चर्चा की गई। रेलवे बोर्ड ने भी इस परियोजना की समीक्षा करते हुए गतिरोध समाप्त करने के प्रयास तेज कर दिए हैं। हाल ही में कोलकाता दौरे के दौरान रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के समक्ष भी इस परियोजना का मुद्दा उठाया गया। बैठक में उत्तर 24 परगना के जनप्रतिनिधियों ने बरानगर–बैरकपुर मेट्रो का निर्माण कार्य जल्द शुरू कराने की मांग की और शेष बाधाओं को शीघ्र दूर करने का आग्रह किया। इस मेट्रो कॉरिडोर के शुरू होने से बी.टी. रोड क्षेत्र के लाखों यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही उत्तर कोलकाता और बैरकपुर औद्योगिक क्षेत्र की कनेक्टिविटी बेहतर होने के साथ यातायात का दबाव कम होगा तथा आसपास के क्षेत्रों में विकास और रियल एस्टेट गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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