

रामबालक, सन्मार्ग संवाददाता
गंगासागर : सागरद्वीप में आयोजित होने वाले भारत के दूसरे सबसे बड़े धार्मिक मेले गंगासागर मेला में बिछड़े हुए श्रद्धालुओं को उनके परिजनों से मिलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली संस्था बजरंग परिषद हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी सक्रिय भूमिका निभा रही है। परिषद न केवल श्रद्धालुओं को उनके परिजनों से मिलवा रही है, बल्कि जिनका कोई पता नहीं चल पा रहा है, उन्हें सुरक्षित रूप से उनके घर तक पहुंचाने की व्यवस्था कर रही है।
सूत्रों के अनुसार, हर वर्ष गंगासागर मेले में हजारों की संख्या में तीर्थयात्री बिछड़ जाते हैं। इन्हें पुलिस प्रशासन और बजरंग परिषद जैसी सामाजिक संस्थाओं की मदद से परिजनों से मिलवाया जाता है। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, इस वर्ष गंगासागर मेले में लगभग 6632 तीर्थयात्री अपने परिवार से बिछड़ गए थे, जिनमें से साढ़े 6 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को उनके परिजनों से मिलवा दिया गया है। इसके बावजूद कुछ तीर्थयात्रियों का पता नहीं चल पाया था, जिन्हें बजरंग परिषद की देखरेख घर वापसी की प्रक्रिया पूरी की गई।
बजरंग परिषद के सेवा मंत्री का बयान
बजरंग परिषद के सेवा मंत्री प्रेमनाथ दुबे ने बताया कि गंगासागर मेले में रोड नंबर-2 स्थित सूचना केंद्र के पास 109वां शिविर लगाया गया था। इसके अलावा अन्य दो जगहों पर यह सेवा शिविर 10 जनवरी से 16 जनवरी तक संचालित रहा। उन्होंने बताया कि इस दौरान हजारों की संख्या में लापता हुए तीर्थयात्रियों को उनके परिजनों से मिलवाया गया। हालांकि, मेला समाप्त होने के बाद भी ऐसे 23 श्रद्धालु मिले, इन सभी को गंगासागर से महानगर के मैढ़ क्षत्रिय धर्मशाला में सुरक्षित लाकर रखने के बाद उन्हें घर भेजने की प्रक्रिया की गई। इस प्रक्रिया के तहत जनरल डायरी (जीडी) दर्ज की जाती है और पुलिस प्रशासन को पूरी जानकारी दी जाती है। बंगाल के रहने वाले श्रद्धालुओं को टिकट और कुछ आर्थिक सहायता देकर उनके घर भेजा जाता है, जबकि अन्य राज्यों के लोगों को संबंधित राज्यों के लिए रवाना किया जाता है। अधिकांश बिछड़े हुए श्रद्धालु वृद्ध आयु वर्ग के हैं।
एक नजर बजरंग परिषद पर :
बिछड़े हुए श्रद्धालुओं को उनके परिजनों से मिलवाने में अहम भूमिका निभाने वाली संस्था बजरंग परिषद की स्थापना वर्ष 1918 में स्वर्गीय दौलत राम चौबे ने की थी। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया था। इसके अतिरिक्त हीरा प्रसाद दुबे संस्था की ड्राफ्टिंग कमेटी के सदस्य थे।