राज्य में विशेष एटीएस का हुआ गठन

461 नए पद मंजूर
फाइल फोटो
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सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में आतंकवाद और उससे जुड़ी सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए एक समर्पित एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड (एटीएस) के गठन को मंजूरी दे दी है। गृह एवं पर्वतीय मामलों के विभाग की पुलिस स्थापना शाखा की ओर से बीते दिनों इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई। एटीएस के गठन के साथ सरकार ने कुल 461 नए पदों के सृजन को भी मंजूरी दी है। सरकार ने एटीएस के गठन के पीछे पश्चिम बंगाल की भौगोलिक एवं रणनीतिक स्थिति को प्रमुख कारण बताया है। राज्य की लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा, नदी तटीय क्षेत्र, घनी आबादी और सीमा पार सामाजिक-सांस्कृतिक संपर्क इसे घुसपैठ, अवैध प्रवास, आतंकवाद, संगठित अपराध और जासूसी जैसी गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील बनाते हैं। अधिसूचना में आतंकवाद के बदलते स्वरूप, साइबर खतरों और अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों के नेटवर्क का भी उल्लेख किया गया है। सरकार का मानना है कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए एक विशेषीकृत और समर्पित पुलिस इकाई की आवश्यकता है।

461 पदों में वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर तकनीकी स्टाफ तक

नए एटीएस में विभिन्न स्तरों पर कुल 461 पद स्वीकृत किए गए हैं। इनमें एक एडीजी, एक आईजीपी, दो डीआईजी, तीन एसपी, दो अतिरिक्त एसपी और 10 डीएसपी शामिल हैं। इसके अलावा 40 इंस्पेक्टर, 60 सब-इंस्पेक्टर, 44 सहायक सब-इंस्पेक्टर और 293 कांस्टेबल के पद होंगे। प्रशासनिक एवं तकनीकी कार्यों के लिए एक हेड क्लर्क, दो यूडीसी, दो एलडीसी तथा संविदा के आधार पर पांच सॉफ्टवेयर डेवलपर भी नियुक्त किए जाएंगे।

इंटेलिजेंस से साइबर जांच तक विशेष विंग

एटीएस के तहत इंटेलिजेंस, ऑपरेशन्स, इन्वेस्टिगेशन, साइबर एवं टेक्निकल इंटेलिजेंस, बॉम्ब डेटा एंड एक्सप्लोसिव एनालिसिस, ट्रेनिंग एंड रिसर्च तथा एडमिनिस्ट्रेशन जैसी विशेषीकृत इकाइयां काम करेंगी। नई इकाई का प्रमुख उद्देश्य आतंकी मॉड्यूल और स्लीपर सेल का पता लगाना, आतंकवादी गतिविधियों को रोकना तथा आतंकवादी संगठनों में भर्ती और कट्टरपंथ की गतिविधियों पर अंकुश लगाना होगा।

पूरे राज्य में रहेगा अधिकार क्षेत्र

अधिसूचना के मुताबिक, एटीएस का अधिकार क्षेत्र पूरे पश्चिम बंगाल में होगा। आवश्यकता पड़ने पर निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए अन्य राज्यों की पुलिस और केंद्रीय जांच एवं सुरक्षा एजेंसियों के समन्वय से राज्य के बाहर भी जांच या अभियान चलाया जा सकेगा। एटीएस को आईबी, एनआईए, एनएसजी, रॉ, एनसीबी, ईडी, बीएसएफ और सीआरपीएफ जैसी केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय कर काम करने की जिम्मेदारी भी दी गई है।

आधुनिक तकनीक और विशेष प्रशिक्षण पर जोर

एटीएस कर्मियों को आतंकवाद विरोधी अभियान, साइबर जांच, बम निरोधक कार्रवाई और बंधक बचाव जैसे क्षेत्रों में विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इकाई को आधुनिक हथियारों, निगरानी उपकरणों और साइबर फॉरेंसिक तकनीक से लैस करने की भी योजना है। सरकार को उम्मीद है कि नई व्यवस्था से राज्य में आतंकवाद और उससे जुड़े संगठित अपराध पर लगाम लगेगा।

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