अराबुल-ऋतब्रत मुलाकात से भांगड़ की राजनीति में हलचल

ISF छोड़ने के पांच महीने बाद विधानसभा पहुंचे अराबुल
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कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस छोड़कर आईएसएफ में शामिल होने के महज पांच महीने बाद अराबुल इस्लाम के राजनीतिक रुख को लेकर एक बार फिर अटकलें तेज हो गयी हैं। सोमवार को विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के कक्ष में अराबुल उनसे काफी देर तक बातचीत करते नजर आये।

इसके बाद सवाल उठने लगा कि क्या वह फिर तृणमूल में लौटने की तैयारी कर रहे हैं? ऋतब्रत ने कहा, “जल्द सब कुछ सामने आयेगा।” उन्होंने बताया कि बातचीत भांगड़ और वहां के लोगों पर हुए कथित अत्याचार को लेकर हुई। उनके मुताबिक, “अराबुल वहां के लंबे समय से जमीनी स्तर के तृणमूल नेता रहे हैं। बातचीत सकारात्मक रही।”

गौरतलब है कि मार्च में अराबुल ने तृणमूल पर निशाना साधते हुए आईएसएफ का दामन थामा था। उन्होंने भांगड़ में शौकत मोल्ला पर गंभीर आरोप लगाते हुए नौशाद सिद्दीकी के नेतृत्व में काम करने की बात कही थी। हालांकि, अगस्त में आईएसएफ से भी उनका मोहभंग हो गया। सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने संगठन पर तानाशाही और अत्याचार का आरोप लगाते हुए इस्तीफे की घोषणा की।

सोमवार की मुलाकात पर अराबुल ने कहा, “मैं किसी के बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहता। कालीघाट खेमे ने मेरे लिए कुछ नहीं किया। ममता बनर्जी ने मुझे सात-सात बार गिरफ्तार करवाया है। ऋतब्रत के साथ अच्छी बैठक हुई। बाकी समय के हाथ में है।” वहीं, आईएसएफ प्रमुख नौशाद सिद्दीकी ने कहा कि भांगड़ की जनता शांतिप्रिय है। उन्होंने चेतावनी दी कि जनता के साथ विश्वासघात या उसे बदनाम करने की कोशिश का जवाब भांगड़ के लोग देंगे।

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