...जब अफ़्रीकी छात्र ने छुए ISI निदेशक के पैर

दीक्षांत समारोह में गुरु-शिष्य परंपरा ने जीता दिल
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कोलकाता : भारतीय सांख्यिकी संस्थान (आईएसआई) के सभागार में गुरुवार को एक ऐसा भावुक दृश्य देखने को मिला, जिसने उपस्थित सभी लोगों का दिल जीत लिया। अफ्रीका के गाम्बिया से आए छात्र सिलास जोबे ने दीक्षांत समारोह के दौरान अपने गुरु प्रो. अमर्त्य कुमार दत्ता, निदेशक, आईएसआई, के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया। गुरु-शिष्य परंपरा की इस झलक ने पूरे माहौल को भावनात्मक बना दिया। प्रो. दत्ता ने भी छात्र को पूरे स्नेह और आत्मीयता के साथ आशीर्वाद दिया।

अंतरराष्ट्रीय सांख्यिकी शिक्षा केंद्र (आईएसईसी) का 77वां दीक्षांत समारोह आईएसआई, कोलकाता में आयोजित किया गया, जिसमें इस वर्ष 18 प्रशिक्षुओं को “स्टैटिस्टिकल थ्योरी एंड एप्लीकेशंस” में डिप्लोमा प्रदान किए गए। इन प्रशिक्षुओं में फिजी, श्रीलंका, म्यांमार, गाम्बिया और जिम्बाब्वे सहित कई देशों के छात्र शामिल थे।

समारोह का उद्घाटन आईएसईसी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के अध्यक्ष प्रो. एस. पी. मुखर्जी ने किया। आईएसआई के निदेशक प्रो. अमर्त्य कुमार दत्ता ने स्वागत भाषण दिया और प्रशिक्षुओं को डिप्लोमा प्रदान किए। आईएसईसी के कार्यवाहक सदस्य-सचिव प्रो. अयनेंद्रनाथ बसु ने संस्थान की वार्षिक गतिविधियों की समीक्षा प्रस्तुत की।

मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रो. बिमल कुमार रॉय ने अपने संबोधन में कहा कि अच्छे डेटा और सही विश्लेषण के बिना सरकारें अंधेरे में चलती हैं। उन्होंने छात्रों को आंकड़ों के नैतिक और जिम्मेदार उपयोग का संदेश देते हुए कहा, “कोरिलेशन हमेशा कॉजेशन नहीं होता।” उन्होंने डेटा के उपयोग के साथ नागरिकों की निजता और विश्वास की रक्षा पर भी जोर दिया।

1950 में प्रो. पी.सी. महालनोबिस की पहल पर स्थापित आईएसईसी अब तक 86 देशों के 1,746 से अधिक प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दे चुका है। यह संस्थान आज भी एशिया और अफ्रीका सहित कई देशों के छात्रों को सांख्यिकी के क्षेत्र में उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है।

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