

सन्मार्ग संवाददाता
बेंगलुरु / कोलकाता : एयरलाइन पायलट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एएलपीए इंडिया) ने पायलटों और आम लोगों के लिए साइकोएक्टिव पदार्थों की जांच को लेकर सलाह जारी की है। एसोसिएशन ने सामान्य दवाओं के सेवन से अनजाने में जांच में ‘नॉन-नेगेटिव’ परिणाम आने की आशंका को लेकर सावधानी बरतने, जांच प्रक्रिया की गोपनीयता एवं गरिमा बनाए रखने और मीडिया से व्यक्तिगत मामलों में संयम बरतने की अपील की है।
एएलपीए इंडिया ने कहा कि नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) के सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट (CAR), सेक्शन-5, एयर सेफ्टी, सीरीज-F पार्ट-V के तहत उड़ान चालक दल, एयर ट्रैफिक कंट्रोलर (ATCO), एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर (AME) सहित सुरक्षा-संवेदनशील कर्मियों की रैंडम साइकोएक्टिव पदार्थ जांच अनिवार्य है। एसोसिएशन ने इस व्यवस्था के उद्देश्य का समर्थन करते हुए कहा कि इसका लक्ष्य विमानन सुरक्षा सुनिश्चित करना और आवश्यकता पड़ने पर समय रहते पहचान एवं पुनर्वास करना होना चाहिए।
एसोसिएशन ने पायलटों को बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाएं लेने से बचने की सलाह दी है। उसके अनुसार कुछ सामान्य ओवर-द-काउंटर (OTC) और प्रिस्क्रिप्शन दवाओं में ऐसे सक्रिय तत्व हो सकते हैं, जिनसे प्रारंभिक स्क्रीनिंग में गलत या गैर-नकारात्मक परिणाम आ सकते हैं। इनमें कुछ सर्दी-जुकाम की दवाओं में पाए जाने वाले फेनाइलएफ्रिन और स्यूडोएफेड्रिन, कोडीन आधारित कफ सिरप तथा कुछ अन्य दवाओं का उल्लेख किया गया है।
एएलपीए इंडिया ने स्पष्ट किया कि प्रारंभिक स्क्रीनिंग में ‘नॉन-नेगेटिव’ परिणाम अपने आप में मादक पदार्थों के सेवन का प्रमाण नहीं है। ऐसे मामलों में पुष्टि के लिए GC-MS/LC-MS जैसी जांच आवश्यक है।
एसोसिएशन ने डीजीसीए से जांच प्रक्रिया के दौरान संबंधित व्यक्ति की गोपनीयता और सम्मान की रक्षा करने का आग्रह किया। साथ ही मीडिया से अपील की कि जांच के व्यक्तिगत मामलों को अंतिम निष्कर्ष आने से पहले सनसनीखेज तरीके से प्रस्तुत करने से बचें और ‘मीडिया ट्रायल’ से परहेज करें।