आशा कर्मियों पर अत्याचार का आरोप, शुभेंदु ने सरकार को ठहराया जिम्मेदार

आरोप लगाया कि बंगाल के अलग-अलग हिस्सों से कोलकाता आने की कोशिश कर रही बड़ी संख्या में आशा कर्मियों को रेलवे स्टेशनों और बस स्टैंडों पर जबरन रोका गया।
शुभेंदु अधिकारी
शुभेंदु अधिकारी
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कोलकाता : पश्चिम बंगाल में आशा कर्मियों के आंदोलन को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने आशा कर्मियों पर कथित पुलिस टॉर्चर का आरोप लगाते हुए राज्य की तृणमूल सरकार पर जोरदार हमला बोला है। बुधवार को कोलकाता और विभिन्न जिलों में आंदोलन के दौरान बने हालात के लिए उन्होंने सीधे तौर पर राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया। शुभेंदु ने कहा कि जिस तरह से आशा कर्मियों के साथ व्यवहार किया गया, उससे साफ है कि राज्य में एक अमानवीय और बेरहम प्रशासन काम कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल के अलग-अलग हिस्सों से कोलकाता आने की कोशिश कर रही बड़ी संख्या में आशा कर्मियों को रेलवे स्टेशनों और बस स्टैंडों पर जबरन रोका गया। कई स्थानों पर पुलिस ने घेराबंदी कर उन्हें ट्रेन और बस पकड़ने से रोका, जबकि कुछ कर्मियों को गाड़ियों में बैठाकर थानों तक ले जाया गया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के राज में मातृशक्ति को अपमानित किया जा रहा है और उन पर हमला किया जा रहा है, जो बेहद निंदनीय है। उन्होंने कहा कि राज्य अब जुल्म और अराजकता की हद पर पहुंच गया है, यहां सही हक के लिए आवाज उठाना देशद्रोह माना जाता है, ऐसा जुल्म तो अंग्रेजों के जमाने में भी नहीं होता था। उन्होंने राज्य के लोकतंत्र समर्थक नागरिकों और सामाजिक संगठनों से आशा कर्मियों की मदद करने की अपील की। इधर, शुभेंदु द्वारा भेजे गए भोजन को आशा कर्मियों ने लेने से इनकार कर दिया और उनसे खुद आकर बात करने की मांग की। वहीं भाजपा महिला मोर्चा की इंचार्ज लॉकेट चटर्जी जब प्रदर्शनकारियों से मिलने पहुंचीं तो उन्हें ‘गो बैक’ के नारों का सामना करना पड़ा।


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