

प्रगति, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : अलीपुर चिड़ियाघर में एक चार वर्षीय नर हिप्पोपोटामस गंभीर न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर से पीड़ित है, जिसके कारण उसके पैरों में अत्यधिक कमजोरी आ गई है। चिड़ियाघर के अधिकारियों के अनुसार नसों से जुड़ी इस समस्या के चलते वह पिछले करीब तीन सप्ताह से चलने में असमर्थ है और अधिकतर समय पानी में ही रह रहा है।
अधिकारियों ने रविवार को बताया कि हिप्पोपोटामस की स्थिति को देखते हुए अलीपुर जू प्रशासन ने एक विशेष मेडिकल बोर्ड का गठन किया है। इस मेडिकल बोर्ड में अलीपुर चिड़ियाघर, बेलगाछिया स्टेट एनिमल हॉस्पिटल और ओडिशा स्थित नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क के अनुभवी पशु चिकित्सक शामिल हैं। सभी विशेषज्ञ मिलकर जानवर की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं और उपचार की रणनीति तय कर रहे हैं।
मेडिकल बोर्ड ने फिलहाल जानवर के पैरों में दोबारा ताकत लाने के उद्देश्य से फिजियोथेरेपी को प्राथमिक उपचार के रूप में अपनाया है। अधिकारियों के अनुसार हिप्पोपोटामस को इंफ्रारेड किरणों के जरिए फिजियोथेरेपी दी जा रही है। यह थेरेपी नसों और मांसपेशियों को सक्रिय करने में सहायक मानी जाती है और आमतौर पर इंसानों के साथ-साथ जानवरों में भी मांसपेशियों, जोड़ों और न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के इलाज में इस्तेमाल की जाती है।
अधिकारी ने बताया कि इंफ्रारेड रेडिएशन नर्वस टिशू को उत्तेजित करने में मदद करता है, जिससे धीरे-धीरे मांसपेशियों की कार्यक्षमता लौटने की उम्मीद रहती है। हालांकि इस स्तर पर यह कहना मुश्किल है कि इलाज में कितना समय लगेगा। चिड़ियाघर प्रशासन का कहना है कि यदि नसें उपचार के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया देती हैं, तो हिप्पोपोटामस के दोबारा चलने की संभावना बनी रहेगी। फिलहाल उसकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है और विशेषज्ञों की टीम लगातार उसकी निगरानी कर रही है।