

राम बालक, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : दक्षिण 24 परगना जिला मुख्यालय स्थित जिला परिषद एवं न्यू एडमिनिस्ट्रेटिव बिल्डिंग में लगी भीषण आग के 24 घंटे बाद भी गुरुवार को दमकल विभाग कूलिंग प्रोसेस में जुटा रहा। आग की इस घटना में कई महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालय पूरी तरह जलकर राख हो गए, जिससे करोड़ों रुपये की संपत्ति के नुकसान की आशंका है। गुरुवार की सुबह प्रतिदिन की तरह सरकारी कर्मचारी अपने-अपने कार्यालय पहुंचे, लेकिन सुरक्षा कारणों से पूरे भवन की घेराबंदी कर दी गई थी। पुलिस और प्रशासन की ओर से किसी भी कर्मचारी को भवन के भीतर प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गई। इसके चलते कुछ समय तक इंतजार करने के बाद कर्मचारी अपने-अपने घर लौट गए। घटना पर है दिल्ली की भी नजर है। जिला प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार आग में तीसरी मंजिल पर स्थित एडीएम जिला परिषद कार्यालय, कृषि कर्माध्यक्ष का कार्यालय, सातवीं मंजिल पर स्थित शिक्षा विभाग, आठवीं मंजिल का सर्व शिक्षा मिशन कार्यालय, एनआईसी तथा ईवीएम सेल और लाइब्रेरी कार्यालय पूरी तरह जलकर नष्ट हो गए हैं। इन कार्यालयों में रखे महत्वपूर्ण दस्तावेज, कंप्यूटर, फर्नीचर एवं अन्य सरकारी सामग्री भी आग की भेंट चढ़ गई।
नौवीं मंजिल में रखी ईवीएम भी आग की चपेट में, जांच तेज
भवन की नौवीं मंजिल पर कोलकाता महानगर क्षेत्र की पांच विधानसभा सीटों से संबंधित इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें (ईवीएम) रखी गई थीं। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक इनमें से लगभग 60 प्रतिशत मशीनें आग से क्षतिग्रस्त हो गई हैं। जिन विधानसभा क्षेत्रों से संबंधित ईवीएम यहां रखी गई थीं उनमें टॉलीगंज, बेहला पूर्व, बेहला पश्चिम और मटियाब्रुज विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। वहीं दूसरी तरफ दिल्ली से चुनाव अधिकारी इस घटना की पल-पल की खबर ले रहे हैं। घटना के बाद कोलकाता पुलिस ने पूरे भवन को चारों ओर से घेर लिया है। आग लगने के कारणों की जांच के लिए फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम को बुलाया गया है। जांच प्रभावित न हो, इसके लिए किसी भी व्यक्ति को भवन में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है। इस दौरान न्यू एडमिनिस्ट्रेटिव बिल्डिंग की चौथी मंजिल स्थित सिविल डिफेंस कार्यालय के कुछ कर्मचारियों ने अंदर जाने का प्रयास किया, लेकिन पुलिसकर्मियों ने सुरक्षा का हवाला देते हुए उन्हें रोक दिया।
आग बुझाने में सबसे बड़ी बाधा बना अतिक्रमण
जिला प्रशासन के एक कर्मचारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि आग लगने के बाद दमकल इंजनों को घटनास्थल तक पहुंचने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। भवन के आसपास दोनों ओर अवैध दुकानों और अतिक्रमण के कारण दमकल वाहनों को पर्याप्त जगह नहीं मिल सकी, जिससे राहत एवं बचाव कार्य प्रभावित हुआ। कर्मचारी का कहना था कि यदि आसपास अतिक्रमण न होता तो दमकल विभाग आग पर अपेक्षाकृत जल्दी काबू पा सकता था और नुकसान कम हो सकता था।
न्यायिक कार्य भी प्रभावित
मनोज मलिक ने घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि प्रशासन पहले से अधिक सतर्क रहता तो इस प्रकार की घटना को रोका जा सकता था। आग की वजह से फॉरेस्ट विभाग परिसर में संचालित एग्जीक्यूटिव कोर्ट-1 और कोर्ट-2 के कामकाज पर भी असर पड़ा है। कार्यालय बंद रहने के कारण कई लोगों को बिना काम निपटाए लौटना पड़ा, जबकि अनेक अधिवक्ता भी अपने मुकदमे दर्ज नहीं करा सके। प्रशासन आग लगने के कारणों की जांच कर रहा है। फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही घटना के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।