

कोलकाता : अंततः अख्तर अली ने अलीपुर स्थित विशेष सीबीआई अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद मंगलवार को अदालत ने उसे 17 फरवरी तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। मंगलवार की सुबह लगभग 11 बजे अख्तर अली अलीपुर स्थित सीबीआई अदालत में पेश हुआ। अख्तर अली की ओर से वकील अमृत सिन्हा ने अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किल को सीबीआई ने 16–17 बार तलब किया और प्रत्येक बार वह जांच एजेंसी के समक्ष उपस्थित हुए। उन्होंने कहा कि अख्तर अली ने जांच के दौरान जांच अधिकारी को पूरा सहयोग दिया है तथा मामले में चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है। ऐसे में हिरासत में लेकर पूछताछ की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि अख्तर अली को अस्पताल की सेवा से निलंबित किया जा चुका है। वहीं संदीप घोष की ओर से वकील संजय दासगुप्ता ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि उच्च न्यायालय ने सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद जमानत आवेदन खारिज किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि अख्तर अली बार-बार अदालत से बचता रहा, जिसके चलते अदालत को उसके खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी करना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में संदीप घोष समेत पांच आरोपित पिछले डेढ़ वर्ष से न्यायिक हिरासत में हैं और अख्तर अली पर अवैध लेन-देन के कई गंभीर आरोप हैं। सीबीआई की ओर से वकील रामबाबू कनौजिया ने अदालत को बताया कि यदि अख्तर अली को जमानत दी गई तो वह साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर सकता है। उन्होंने कहा कि आरोपित लंबे समय तक फरार रहा है, इसलिए जमानत का विरोध किया गया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अख्तर अली को 17 फरवरी तक न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया।