अहमदाबाद एयर क्रैश : मुआवजे के बदले कानूनी अधिकार छोड़ने को कहा जा रहा

अमेरिकी लॉ फर्म का आरोप
अहमदाबाद एयर क्रैश : मुआवजे के बदले कानूनी अधिकार छोड़ने को कहा जा रहा
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सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता : अहमदाबाद विमान हादसे में मारे गए और घायल हुए लोगों के परिजनों को एयर इंडिया द्वारा अंतिम मुआवजा राशि की पेशकश की जा रही है, लेकिन इसके बदले उनसे एक इंडेम्निटी वेवर (दायित्व मुक्ति पत्र) पर हस्ताक्षर कराने का प्रयास किया जा रहा है। यह दावा अमेरिका की कान्सास सिटी स्थित चियोनुमा लॉ फर्म ने किया है, जो इस हादसे में मारे गए 260 लोगों में से 103 मृतकों के परिवारों और 67 गंभीर रूप से घायलों का प्रतिनिधित्व कर रही है।

फर्म के केस मैनेजर ने कहा कि एयरलाइन परिवारों से यह लिखित सहमति चाहती है कि वे एयर इंडिया, विमान निर्माता बोइंग, इंजन निर्माता जनरल इलेक्ट्रिक, जीई एयरोस्पेस, हनीवेल इंटरनेशनल इंक, भारत सरकार, नागरिक उड्डयन मंत्रालय, डीजीसीए, एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया और अहमदाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड के खिलाफ भविष्य में कोई कानूनी दावा नहीं करेंगे।

उनके अनुसार, पिछले सात दिनों में एक परिवार को कुल 35 लाख रुपये का अंतिम समझौता प्रस्ताव दिया गया, जिसमें 25 लाख रुपये पहले अंतरिम मुआवजे के रूप में दिए जा चुके थे। “हमने उन्हें दस्तावेज पर हस्ताक्षर न करने की सलाह दी। जांच अभी जारी है, पूरी सच्चाई सामने नहीं आई है और जिम्मेदारी तय नहीं हुई है। ऐसे में शोकाकुल परिवारों से उनके सभी कानूनी अधिकार छोड़ने को कहना उचित नहीं है,” दुबे ने कहा।

इस पर जब एयर इंडिया से सवाल किया गया कि जांच पूरी होने से पहले इतने पक्षों को वेवर में शामिल क्यों किया गया, तो एयरलाइन के प्रवक्ता ने कहा कि “प्रत्येक परिवार को दी जा रही अंतिम राशि कानून के अनुरूप और उचित है। पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और संवेदनशील तरीके से की गई है।” एयरलाइन ने यह भी कहा कि मुआवजे की गणना लागू कानूनी ढांचे के तहत की गई है और यह प्रत्येक परिवार की परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग है।

एयरलाइन ने कहा, “हम विशिष्ट मामलों पर टिप्पणी नहीं कर सकते, लेकिन हम प्रभावित परिवारों के साथ खड़े हैं। हमें समझ है कि आर्थिक मुआवजा किसी अपने की कमी पूरी नहीं कर सकता, फिर भी अंतिम मुआवजे को लेकर स्पष्टता परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है।”

अहमदाबाद के एक मेडिकल छात्र ने बताया कि उन्होंने अपने ढाई महीने के बेटे के अभिभावक के रूप में 3 लाख रुपये के बदले दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए, जबकि उनकी सास को 5 लाख रुपये दिए गए। “हम नहीं जानते थे कि हम अपने सभी कानूनी अधिकार छोड़ रहे हैं और बोइंग को भी जिम्मेदारी से मुक्त किया जा रहा है,” उन्होंने कहा। उनके अनुसार, उनकी सास और बेटा गंभीर रूप से घायल नहीं हुए, लेकिन सास पोस्ट-ट्रॉमा एंग्जायटी से जूझ रही हैं और बेटे को सांस संबंधी दिक्कत है।

लॉ फर्म का आरोप है कि इस वेवर का उद्देश्य परिवारों को अन्य देशों में, विशेषकर विमान निर्माता के खिलाफ, मुकदमा दायर करने से रोकना है। दस्तावेज की एक धारा में कहा गया है कि यह इंडेम्निटी किसी भी देश या न्यायक्षेत्र में दायर दावों पर लागू होगी।

चियोनुमा लॉ फर्म बोइंग समेत अन्य कंपनियों के खिलाफ क्लास एक्शन मुकदमा दायर कर रही है। फर्म का दावा है कि हादसा पायलट की गलती से नहीं, बल्कि इलेक्ट्रिकल सिस्टम की खराबी के कारण हुआ। लंदन हाईकोर्ट में भी कई परिवारों ने व्यक्तिगत चोट के मुकदमे दायर किए हैं, जबकि कुछ परिवार अमेरिका में बोइंग के खिलाफ ईंधन स्विच में कथित खामी को लेकर कानूनी कार्रवाई कर रहे हैं। कई घायल अभी भी इलाज करा रहे हैं। उन्हें यह भी नहीं पता कि भविष्य में कितने खर्च की जरूरत पड़ेगी। ऐसे समय में उनसे सभी दावों का अधिकार छोड़ने को कहना अनुचित है। इतना बड़ा फैसला पूरी जांच और स्पष्ट तथ्यों के सामने आने के बाद ही लिया जाना चाहिए।

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