

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट मुद्दे पर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा 28 फरवरी के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी करने और नाम छूटने पर सड़क पर उतरने की चेतावनी ने सियासी बहस को और तेज कर दिया है। इस बयान पर भाजपा विधायक अग्निमित्रा पाल ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए राज्य सरकार पर लोगों को भड़काने की राजनीति करने का आरोप लगाया। अग्निमित्रा पाल ने कहा कि पिछले पंद्रह वर्षों से बार-बार जनता के बीच भ्रम फैलाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि CAA के समय भी माहौल को जानबूझकर तनावपूर्ण बनाया गया, जिससे अशांति फैली और सरकारी संपत्ति को नुकसान हुआ, लेकिन जिम्मेदार लोगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने दावा किया कि लगभग 1 करोड़ 20 लाख नाम मतदाता सूची से कट रहे हैं और इसकी जानकारी मुख्यमंत्री को पहले से है। उन्होंने कहा कि यदि किसी वैध मतदाता का नाम हटता है तो इसकी जिम्मेदारी राज्य प्रशासन की होगी, क्योंकि BLO, ERO, AERO और DO सभी सरकार के अधीन हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संवैधानिक प्रक्रिया पर सवाल उठाकर माहौल भड़काने की कोशिश हो रही है। आसनसोल साउथ समेत 18 जगहों पर फॉर्म-7 जलाने के आरोप लगे, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई रिपोर्ट सामने नहीं आई। पाल ने कहा कि गैर-कानूनी वोटरों के नाम हटना स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन अगर एक भी वैध मतदाता का नाम छूटता है तो इसकी जवाबदेही प्रशासन की होगी। साथ ही शिक्षा भर्ती भ्रष्टाचार मामले में विकास अधिकारी के ईडी दफ्तर पहुंचने पर पाल ने सवाल उठाया कि इस घोटाले का असली मास्टरमाइंड कौन है। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस पर भ्रष्ट लोगों को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए लोगों से सोच-समझकर वोट देने की अपील की।