

कोलकाता : सत्ता से बाहर होने के दो महीने बाद तृणमूल कांग्रेस (ममता गुट) के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी ने अपनी पुरानी पहल ‘एक डाके अभिषेक’ को नए रूप में फिर शुरू करने की घोषणा की है।
मंगलवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर उन्होंने बताया कि पार्टी के बेघर, उत्पीड़ित और राजनीतिक कारणों से झूठे मामलों में फंसाए गए कार्यकर्ताओं को कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है।
भाजपा सरकार बनने के बाद तृणमूल संगठन में टूट और निष्क्रियता की चर्चा तेज हो गई है। वहीं, अभिषेक स्वयं भी विभिन्न मामलों में ईडी और सीआईडी की पूछताछ का सामना कर चुके हैं। उनके करीबी सहयोगी सुमित राय की तलाश में सीआईडी ने हाल ही में उनके कालीघाट स्थित आवास पर भी छापेमारी की थी।
हालांकि, इस पहल की प्रभावशीलता को लेकर पार्टी के भीतर ही सवाल उठने लगे हैं। इस मुद्दे पर ‘ऋतब्रत गुट’ के तृणमूल विधायक अखरुज्जामान ने कहा कि केवल फोन के जरिए संगठन नहीं चलाया जा सकता। कार्यकर्ताओं के बीच जाकर उनके साथ खड़ा होना पड़ता है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि अभिषेक में हिम्मत है तो उन्हें चार्टर्ड फ्लाइट छोड़कर पैदल अपने कार्यकर्ताओं के पास जाना चाहिए। वहीं, विपक्षी नेता ऋतब्रत बंद्योपाध्याय ने कहा कि उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कार्यकर्ताओं की मदद के लिए किया जाना चाहिए।