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कोलकाता सिटी
आपदा और आपात स्थितियों से निपटने के लिए लालबाजार ने जारी की नई एसओपी
अब सीधे सड़कों पर तैनात रहेंगी आपातकालीन गाड़ियां
दीपक, सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता :
तारातला में निर्माणाधीन गोदाम ढहने जैसी प्राकृतिक और मानवजनित आपदाओं, आतंकी हमलों तथा अन्य गंभीर आपात स्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए कोलकाता पुलिस मुख्यालय लालबाजार ने नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है। कोलकाता के पुलिस आयुक्त अजय नंद ने मंगलवार को इस नई कार्यप्रणाली की औपचारिक शुरुआत की।पुलिस सूत्रों के अनुसार, नई एसओपी का मुख्य उद्देश्य आपदा या आपात स्थिति के दौरान प्रभावित लोगों की जान बचाना और नुकसान को न्यूनतम करना है। इसके साथ ही आतंकी हमले या इंडियन म्यूजियम जैसी गोलीबारी की घटनाओं में घटनास्थल से महत्वपूर्ण साक्ष्यों और सबूतों को सुरक्षित रखना भी प्राथमिकता में शामिल किया गया है। इस एसओपी के तहत आपातकालीन वाहनों और मोटरसाइकिलों की तैनाती, कर्मियों की जवाबदेही तथा निगरानी व्यवस्था के संबंध में कड़े दिशा-निर्देश तय किए गए हैं।
10 मिनट में घटनास्थल पहुंचना अनिवार्य, वरना होगी जांच
नई व्यवस्था के तहत आपात स्थितियों से निपटने के लिए इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम (ईआरएसएस) को मजबूत किया गया है। किसी भी आपातकालीन कॉल या अलर्ट की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम को अधिकतम 10 मिनट के भीतर घटनास्थल पर पहुंचना अनिवार्य होगा। निर्धारित समय सीमा में मौके पर नहीं पहुंचने या घटनास्थल पर गए बिना कॉल बंद करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच और कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
थाने या रिजर्व ऑफिस में नहीं खड़े होंगे ईआरएसएस वाहन
जारी निर्देशों के अनुसार, ईआरएसएस वाहनों और मोटरसाइकिलों को अब किसी भी थाने या डिविजनल रिजर्व ऑफिस में खड़ा नहीं रखा जाएगा। ये वाहन केवल निर्धारित प्रमुख स्थानों (वेंटेज पॉइंट्स) पर सड़कों पर ही तैनात रहेंगे ताकि आपात सूचना मिलते ही तुरंत रवाना हुआ जा सके। इसके अलावा, इन गाड़ियों का उपयोग किसी अन्य रूटीन ड्यूटी या निजी कार्यों के लिए नहीं किया जा सकेगा। एसओपी के तहत ईआरएसएस से जुड़े पुलिसकर्मियों और वाहनों को सामान्य पुलिस ड्यूटी में नहीं लगाया जाएगा। इस व्यवस्था में शामिल बाइक और वाहनों को आपातकालीन परिस्थितियों में तत्काल इस्तेमाल के लिए उपलब्ध रखा जाएगा।
सुरक्षा, सबूत और संवेदनशीलता पर जोर
घटनास्थल पर पहुंचते ही जवानों की पहली प्राथमिकता जीवन रक्षा, पीड़ितों की सहायता और सबूतों को सुरक्षित करना होगी। महिलाओं, बच्चों या संवेदनशील मामलों में पुलिस कर्मियों को विशेष संवेदनशीलता के साथ त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
जीपीएस बंद करने या लापरवाही पर होगी विभागीय कार्रवाई
पुलिसकर्मियों की ड्यूटी का ब्योरा ''ड्यूटी मित्र ऐप'' पर एक दिन पहले दर्ज किया जाएगा। ड्यूटी की शुरुआत में वाहनों के ईंधन, ब्रेक, सायरन, फर्स्ट-एड किट और संचार उपकरणों की जांच अनिवार्य कर दी गई है। वाहनों का जीपीएस या संचार तंत्र बंद करने, बेवजह देरी करने या अनधिकृत उपयोग पाए जाने पर संबंधित कर्मियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी। संबंधित संयुक्त पुलिस आयुक्त (मुख्यालय) और अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (V) पाक्षिक आधार पर डिविजनल डीसी के साथ इस पूरी व्यवस्था की समीक्षा करेंगे।

