रवींद्र सरोवर के रखरखाव के लिए बनेगा सालभर का SOP

KMDA उठाएगा ठोस कदम
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रवींद्र सरोवर के रखरखाव के लिए KMDA उठाएगा ठोस कदम
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कोलकाता : रवींद्र सरोवर की साफ-सफाई और पर्यावरणीय स्थिति को बेहतर बनाए रखने के लिए कोलकाता मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (KMDA) अब सालभर के रखरखाव की विस्तृत योजना तैयार करेगा।

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के निर्देशों के बाद KMDA विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों को शामिल करते हुए एक मॉडल स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार करने जा रहा है। इसका उद्देश्य सरोवर के जलाशयों की नियमित सफाई, जलीय खरपतवार पर नियंत्रण और द्वीपों के किनारों के कटाव को रोकना है।

जलीय खरपतवार और जलकुंभी पर रहेगी खास नजर

NGT ने रवींद्र सरोवर के पब्लिक पूल और पद्मपुकुर जलाशय में जलीय खरपतवार और जलकुंभी की अत्यधिक वृद्धि को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा है। इसके साथ ही सरोवर के भीतर स्थित द्वीपों के किनारों पर मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए विशेष किस्म के पौधे और पौधों की प्रजातियां लगाने का निर्देश दिया गया है।

KMDA को सूखे मौसम में जलस्तर कम होने पर जलाशय के किनारों पर दिखाई देने वाले हिस्सों की मैनुअल डी-सिल्टिंग यानी हाथ से गाद निकालने की व्यवस्था करने को भी कहा गया है। इसके अलावा पानी की सतह पर तैरने वाले कचरे और अन्य सामग्री की पूरे साल नियमित रूप से मैनुअल सफाई के लिए सख्त व्यवस्था लागू की जाएगी।

चुनिंदा हिस्सों में होगी मैकेनिकल ड्रेजिंग

सरोवर के कुछ चिन्हित हिस्सों में भारी मात्रा में जमा गाद और तलछट को हटाने के लिए मैकेनिकल ड्रेजिंग कराने का भी निर्देश दिया गया है। माना जा रहा है कि लंबे समय से जमा सिल्ट, तलछट और गैर-जैव अपघटनीय सामग्री ने जलाशय की स्थिति को प्रभावित किया है।

पर्यावरण से जुड़े विशेषज्ञों का भी मानना है कि रवींद्र सरोवर जैसे करीब एक सदी पुराने कृत्रिम जलाशय के अस्तित्व और पारिस्थितिकी को बनाए रखने के लिए नियमित ड्रेजिंग और पूरे साल प्रभावी रखरखाव बेहद जरूरी है। KMDA का प्रस्तावित SOP इसी दिशा में स्थायी और व्यवस्थित व्यवस्था तैयार करने की कोशिश माना जा रहा है।

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