मरीज के पेट से निकला 13 किलो का दुर्लभ रेट्रोपेरिटोनियल ट्यूमर

पूर्वी भारत का पहला मामला, एसएसकेएम अस्पताल में सफल सर्जरी
मरीज के पेट से निकला रेट्रोपेरिटोनियल ट्यूमर
मरीज के पेट से निकला रेट्रोपेरिटोनियल ट्यूमर
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कोलकाता : एसएसकेएम अस्पताल के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग ने एक अत्यंत जटिल और दुर्लभ सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देकर चिकित्सा क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। डॉक्टरों की टीम ने एक मरीज के पेट से लगभग 30 सेंटीमीटर आकार और 13 किलोग्राम वजन का विशाल रेट्रोपेरिटोनियल लिपोसारकोमा ट्यूमर सफलतापूर्वक निकाला। डॉक्टरों के अनुसार यह पूर्वी भारत का पहला ऐसा मामला है। जानकारी के मुताबिक उत्तर 24 परगना जिले के हाबरा थाना इलाके के 56 वर्षीय मरीज लंबे समय से डायबिटीज से ग्रसित है। मरीज को पिछले आठ महीनों से पेट के धीरे-धीरे फूलने और लगातार हल्के दर्द की शिकायत थी। हाबरा जनरल अस्पताल में प्रारंभिक जांच के दौरान किए गए अल्ट्रासोनोग्राफी में पेट के एपिगैस्ट्रियम से लेकर पेल्विस तक फैला एक अत्यंत बड़ा ट्यूमर पाया गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मरीज को तुरंत एसएसकेएम अस्पताल के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी ओपीडी में रेफर कर दिया गया। सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. (डॉ.) जयेश कुमार झा के नेतृत्व में मरीज का इलाज शुरू किया गया। शारीरिक परीक्षण के दौरान मरीज के पेट के बाईं ओर पूरे हिस्से में फैली एक बड़ी, नरम और दर्दरहित सूजन पाई गई। सीईसीटी स्कैन में लगभग 30 सेंटीमीटर का विशाल रेट्रोपेरिटोनियल लिपोसारकोमा चिह्नित किया गया।

ट्यूमर के दबाव से मरीज की इन्टेस्टाइन, लेफ्ट यूरेटर और आसपास के अंग प्रभावित हो रहे थे। डॉक्टरों की टीम ने मरीज की फौरन सर्जरी करने का निर्णय लिया। सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि ट्यूमर पेट की कुल एब्डोमिनल कैविटी के लगभग 75 प्रतिशत हिस्से पर फैल गया है। ट्यूमर पूरी तरह से बाईं मेसोकोलन में घुस चुका था और बाईं किडनी और लेफ्ट यूरेटर को अपनी जगह से स्थानांतरित कर चुका था। करीब 4 घंटे तक चली इस जटिल सर्जरी में डॉक्टरों की टीम ने डिसेक्शन करते हुए सभी प्रमुख रक्त वाहिकाओं, बाईं किडनी और अन्य महत्वपूर्ण अंगों को सुरक्षित रख कर ट्यूमर को लेफ्ट कोलन के साथ एन-ब्लॉक सहित निकाल दिया। प्रो. (डॉ.) जयेश कुमार झा ने बताया कि रेट्रोपेरिटोनियल लिपोसारकोमा एक अत्यंत दुर्लभ बीमारी है। कुल कैंसर मामलों में इसके लगभग 1 प्रतिशत से भी कम केस रिपोर्ट होते हैं। उन्होंने बताया कि यह ट्यूमर पेट के पीछे उस स्थान में विकसित होता है जहां काफी जगह होती है, इसलिए मरीज को लंबे समय तक यह अंदाजा नहीं लग पाता कि ट्यूमर लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, प्राइमरी रेट्रोपेरिटोनियल ट्यूमर शरीर के उस हिस्से में होते हैं जहां बड़ी रक्त वाहिकाएं, किडनी और पैंक्रियाज जैसे महत्वपूर्ण अंग स्थित रहते हैं। इसी कारण ये ट्यूमर बहुत बड़े आकार के हो जाते हैं और इनकी सर्जरी अत्यंत चुनौतीपूर्ण होती है। मरीज को कुछ दिनों तक ऑब्जर्वेशन में रखने के बाद उसे डजिस्चार्ज कर दिया गया।

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