

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : पश्चिम बंगाल का मुर्शिदाबाद जिला गंभीर जनस्वास्थ्य चुनौतियों का सामना कर रहा है। जिले के निवासी बढ़ते कुपोषण, नवजात एवं शिशु मृत्यु दर, बाल विवाह, संस्थागत प्रसव के निम्न स्तर, उच्च रक्तचाप एवं हृदय रोग, तंबाकू सेवन, श्वसन संबंधी रोग तथा बार-बार होने वाले संक्रमण के शिकार हैं।
इन चुनौतियों के समाधान हेतु अंबुजा फाउंडेशन ने नरोतम सेखसरिया फाउंडेशन के साथ साझेदारी की है। इसके अंतगर्त वर्ष 2024 में एक पाँच वर्षीय समेकित स्वास्थ्य पहल प्रारंभ की गई है। ये पहल फरक्का ब्लॉक की तीन ग्राम पंचायतों के 47 गाँवों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से शुरू की गई है, जिससे 86,000 से अधिक लोग लाभान्वित हो रहे हैं।
यह साझेदारी पश्चिम बंगाल सरकार के सहयोग से प्राथमिक स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत करने, अंतिम छोर तक सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित करने तथा ग्राम स्तरीय संस्थाओं को सशक्त बनाने पर केंद्रित है। जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की कमी को दूर करना और उनकी क्षमता निर्माण इस पहल की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
वर्ष 2024 से अब तक 165 से अधिक अग्रणी कार्यकर्ताओं—जिनमें आशा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाएँ और सखियाँ शामिल हैं—को मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण, जल, स्वच्छता एवं स्वच्छ व्यवहार (WASH), गैर-संचारी रोग (NCDs), मानसिक स्वास्थ्य तथा रोगों की प्रारंभिक पहचान के विषय में प्रशिक्षण दिया गया है। सेवा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्रतिवर्ष प्रशिक्षण आयोजित किए जाएंगे।
मुख्य क्षेत्र इस प्रकार हैं:
* मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य: किशोरियों में प्रजनन एवं यौन स्वास्थ्य जागरूकता, बाल विवाह एवं अल्पायु गर्भधारण की रोकथाम पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रारंभिक गर्भ पंजीकरण, समय पर प्रसव, पूर्व एवं प्रसवोत्तर देखभाल, व्यवहार परिवर्तन संचार, पोषण हस्तक्षेप, आयरन एवं फोलिक एसिड पूरकता, टीकाकरण, संस्थागत प्रसव और परिवार नियोजन के माध्यम से उल्लेखनीय सुधार का कार्य किया जा रहा हैं।
* पोषण सुधार: पोषण संबंधी गहरी चुनौतियों को दूर करने के लिए पोषण जागरूकता, व्यवहार परिवर्तन संचार, पोषण प्रदर्शन तथा किचन गार्डन को बढ़ावा दिया जा रहा है। 79 आंगनवाड़ी केंद्रों को वैज्ञानिक रूप से शारीरिक स्वास्थ्य मापन (एंथ्रोपोमेट्री प्रणाली) हेतु उपकरणों से सुसज्जित किया गया है। किचन गार्डन और परिवार स्तर के पोषण सत्रों से 1,300 से अधिक व्यक्ति लाभान्वित हुए हैं।
* गैर-संचारी रोगों की रोकथाम एवं स्क्रीनिंग: बढ़ते NCD बोझ को देखते हुए सामुदायिक आधारित मूल्यांकन चेकलिस्ट (CBAC), वार्षिक बायोमार्कर जांच, जागरूकता सत्र और विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। उच्च वसा, नमक और चीनी (HFSS) वाले खाद्य पदार्थों तथा तंबाकू सेवन जैसे जोखिम कारकों पर विशेष जागरूकता और जीवनशैली में बदलाव पर बल दिया जा रहा है।
* स्वास्थ्य अवसंरचना एवं WASH सुदृढ़ीकरण: 20 आंगनवाड़ी केंद्रों का ‘बाला’ (Building as Learning Aid) चित्रकारी के साथ नवीनीकरण किया गया है तथा स्वच्छ पेयजल प्रणालियाँ स्थापित की गई हैं। कुछ गाँवों को अपशिष्ट प्रबंधन प्रयासों के साथ ‘निर्मल ग्राम’ बनाने पर कार्य किया जा रहा है। विद्यालयों में सेनेटरी निपटान प्रणाली भी स्थापित की जा रही है।
इस पहल के बारे में बोलते हुए, पर्ल तिवारी, सीईओ, अंबुजा फाउंडेशन ने कहा, “अंबुजा फाउंडेशन और नरोतम सेखसरिया फाउंडेशन ग्रामीण समुदायों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने को प्रतिबद्ध हैं। इस पहल के माध्यम से हम ग्रामीण स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत करना चाहते हैं, जो सतत विकास के प्रमुख स्तंभ में से एक हैं। हमें विश्वास है कि यह साझेदारी स्वस्थ ग्रामीण समाज के निर्माण में हमारी सामूहिक कोशिशों को और मजबूत करेगी।”
मनीष जोशी, सीईओ, नरोतम सेखसरिया फाउंडेशन ने कहा, “नरोतम सेखसरिया फाउंडेशन इस नवाचार और समुदाय-आधारित स्वास्थ्य पहल से जुड़कर प्रसन्न है। हमें विश्वास है कि यह पहल ग्रामीण समुदायों के जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार लाएगी और सतत परिवर्तन को बढ़ावा देने वाला एक सशक्त विकास मॉडल स्थापित करेगी। हम इस सकारात्मक परिवर्तन की प्रक्रिया में सभी हितधारकों के समर्पित योगदान की सराहना करते हैं।”
यह साझेदारी स्वास्थ्य उप-केंद्रों और आंगनवाड़ी केंद्रों को और मजबूत करेगी, सेवा कवरेज बढ़ाएगी तथा समग्र ग्रामीण स्वास्थ्य परिवर्तन के लिए ‘स्वच्छ एवं स्मार्ट ग्राम मॉडल विकसित करेगी। मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन कार्यक्रमों का विस्तार किया जाएगा और किशोर सहकर्मी शिक्षकों को सामुदायिक स्वास्थ्य नेतृत्व के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। अगले चरण में बाल विवाह और अल्पायु गर्भधारण में कमी, शिशु एवं मातृ मृत्यु दर में कमी तथा पात्र दंपत्तियों के लिए परिवार नियोजन सेवाओं की पहुँच बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।