बंगीय हिंदी परिषद में सजी भव्य काव्य संध्या, वाराणसी के साहित्यकार अखलाक ‘भारतीय’ का हुआ सम्मान

शब्द साधना और बंगीय हिंदी परिषद के संयुक्त आयोजन में 40 साहित्यकारों ने प्रस्तुत कीं स्वरचित रचनाएं, गीत, गजल, मुक्तक और दोहों ने बांधा समां
Kolkata
बंगीय हिंदी परिषद में सजी भव्य काव्य संध्या
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कोलकाता : बंगीय हिंदी परिषद और शब्द साधना के संयुक्त तत्वावधान में वाराणसी से पधारे साहित्यकार अख़लाक ख़ान ‘भारतीय’ के सम्मान में बंगीय हिंदी परिषद के ऐतिहासिक सभागार में भव्य काव्य संध्या का आयोजन किया गया।

साहित्यिक वातावरण में आयोजित इस कार्यक्रम में कोलकाता, हावड़ा और हुगली जिले से आए लगभग 40 साहित्यकारों और साहित्यप्रेमियों ने सहभागिता की। रचनाकारों ने अपनी स्वरचित कविताओं, गीतों, ग़ज़लों, मुक्तकों, गजलों, गद्य कविताओं, चौपाइयों और दोहों के माध्यम से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता शब्द साधना की अध्यक्ष श्यामा सिंह ने की। मुख्य अतिथि के रूप में वाराणसी से आए अख़लाक ख़ान ‘भारतीय’ उपस्थित रहे, जबकि नंदलाल रोशन और रौनक अफ़रोज विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।

सरस्वती वंदना से हुआ साहित्यिक संध्या का शुभारंभ

कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. उर्मिला साव द्वारा प्रस्तुत मधुर सरस्वती वंदना से हुई। इसके बाद शब्द साधना के साहित्य मंत्री शिवम तिवारी ने स्वागत वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए अतिथियों और उपस्थित साहित्यकारों का अभिनंदन किया।

इस साहित्यिक आयोजन का आह्वान बंगीय हिंदी परिषद के उपाध्यक्ष एवं शब्द साधना के महासचिव राम पुकार सिंह ‘पुकार गाजीपुरी’ तथा बंगीय हिंदी परिषद के प्रबंध मंत्री कमल पुरोहित ‘अपरिचित’ ने किया था। आयोजन का उद्देश्य साहित्यकारों को एक साझा मंच प्रदान करना और हिंदी साहित्य की रचनात्मक परंपरा को प्रोत्साहित करना रहा।

स्वरचित रचनाओं ने श्रोताओं को किया मंत्रमुग्ध

काव्य संध्या में विभिन्न विधाओं की प्रस्तुतियों ने साहित्यप्रेमियों का ध्यान आकर्षित किया। रचनाकारों ने अपनी मौलिक रचनाओं के माध्यम से सामाजिक सरोकारों, मानवीय संवेदनाओं और जीवन के विविध अनुभवों को शब्द दिए। गीत, गजल, मुक्तक, गद्य कविता, चौपाई और दोहों की प्रस्तुतियों से सभागार साहित्यिक रंगों से सराबोर हो उठा।

मुख्य अतिथि अख़लाक ख़ान ‘भारतीय’ ने भी अपनी कई रचनाओं का पाठ किया। उनकी प्रस्तुतियों को श्रोताओं ने सराहा। आयोजकों ने उन्हें एक अनुभवी और समर्पित काव्य साधक के रूप में रेखांकित किया। उनकी रचनाओं ने कार्यक्रम में उपस्थित साहित्यप्रेमियों के बीच विशेष प्रभाव छोड़ा।

तीन जिलों के साहित्यकारों की रही सहभागिता

इस काव्य संध्या में कोलकाता, हावड़ा और हुगली के अनेक प्रतिष्ठित एवं उभरते रचनाकारों ने भाग लिया। प्रमुख प्रतिभागियों में शिवम तिवारी, धर्म देव सिंह, डॉ. उर्मिला साव, बिश्वजीत सिन्हा, शकील गोंडवी, सुरेश शॉ, सुरेन्द्र सिंह, दया शंकर मिश्र, कृष्ण कुमार दूबे, कमल पुरोहित ‘अपरिचित’, सेराज खान ‘बातिश’, राम नारायण झा,

सहर मजीदी, राम पुकार सिंह ‘पुकार ग़ाज़ीपुरी’, जोया अहमद, रंजीत सिंह, डॉ. शाहिद फ़रोगी, रुख़सार खान, आफ़ताब अहमद ख़ान, रंजना झा, अश्विनी झा, सारांश झा, आलिया खान, मोहम्मद इमाम, लक्ष्मी जायसवाल, आलोक चौधरी, भारती मिश्रा, मोहम्मद अयूब वारसी, मुज़्तर इफ़्तिख़ारी, फ़ौजिया अख़्तर रिदा, हीरालाल सुजान और नश्तर शाहिदी सहित अन्य साहित्यकार शामिल रहे।

इन रचनाकारों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विविध साहित्यिक अभिव्यक्तियों का मंच प्रदान किया और क्षेत्र में हिंदी साहित्य के प्रति सक्रिय रुचि को प्रदर्शित किया।

कुशल संचालन और धन्यवाद ज्ञापन

कार्यक्रम का कुशल संचालन प्रदीप कुमार धानुक ने किया। उन्होंने पूरे आयोजन को सुव्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाया और प्रस्तुतियों के बीच साहित्यिक संवाद का वातावरण बनाए रखा। अंत में बंगीय हिंदी परिषद के प्रबंध मंत्री कमल पुरोहित ‘अपरिचित’ ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों, रचनाकारों और उपस्थित साहित्यप्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

साहित्यिक संवाद और रचनात्मकता को मिला मंच

बंगीय हिंदी परिषद और शब्द साधना का यह संयुक्त आयोजन साहित्यकारों के बीच संवाद, रचनात्मक अभिव्यक्ति और हिंदी साहित्य के संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया। वाराणसी से आए अख़लाक ख़ान ‘भारतीय’ के सम्मान में आयोजित इस काव्य संध्या ने विभिन्न क्षेत्रों के रचनाकारों को एक मंच पर लाकर साहित्यिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित किया।

कार्यक्रम में प्रस्तुत विविध विधाओं की रचनाओं और साहित्यकारों की सक्रिय सहभागिता ने यह संदेश दिया कि साहित्य समाज को संवेदनशील बनाने, विचारों को अभिव्यक्ति देने और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम है।

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