महर्षि दधीचि के आदर्शों पर चलकर परोपकार को बढ़ावा देने का आह्वान

Kolkata
महर्षि दधीचि सेवा ट्रस्ट
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कोलकाता : महर्षि दधीचि सेवा ट्रस्ट की ओर से शनिवार को महर्षि दधीचि भवन में महर्षि दधीचि जयंती समारोह श्रद्धा और सामाजिक सेवा की भावना के साथ आयोजित किया गया। समारोह को संबोधित करते हुए पश्चिम बंगाल के शहरी विकास एवं नगरपालिका कार्य राज्यमंत्री उमेश राय ने कहा कि विश्व कल्याण के लिए महर्षि दधीचि ने अपना देह तक दान कर दिया।

उनके जैसा त्याग और महादान का उदाहरण विश्व इतिहास में दुर्लभ है। उन्होंने लोगों से दधीचि के आदर्शों का अनुसरण करते हुए समाज और मानवता के हित में कार्य करने का आह्वान किया।

विशिष्ट अतिथि पूर्व उप-मेयर एवं पार्षद मीना देवी पुरोहित ने महर्षि दधीचि को श्रेष्ठ उपकारी ऋषि बताते हुए रक्तदान, चक्षुदान, अन्नदान और संपत्ति दान जैसे जनकल्याणकारी कार्यों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सामाजिक संस्थाएं इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

समारोह में समाजसेवी एवं जोड़ासांको विधायक विजय ओझा को उनके सामाजिक योगदान के लिए ‘समाज गौरव सम्मान’ से सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करने के बाद ओझा ने ट्रस्ट के प्रति आभार जताते हुए युवाओं से संगठित होकर समाजसेवा के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। समारोह की अध्यक्षता ओमप्रकाश जोपट ने की।

कार्यक्रम के प्रारंभ में ट्रस्ट अध्यक्ष प्रदीप सूंटवाल ने सपत्नीक मातेश्वरी दधिमथी एवं महर्षि दधीचि की विधिवत पूजा-अर्चना की और सामूहिक आरती हुई। दोपहर में अनुपमा आसोपा, पिंकी दाधीच एवं सहयोगी महिलाओं ने मंगलपाठ किया।

समाज के मेधावी विद्यार्थियों को रजत पदक एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। इसके अलावा सिट एंड ड्रॉ, मेहंदी रचना, निबंध एवं आरती थाली सज्जा प्रतियोगिताओं के विजेताओं को भी पुरस्कृत किया गया।

समारोह में श्री बड़ाबाजार कुमारसभा के अध्यक्ष महावीर बजाज, राहुल, संतोष पाठक तथा रवीन्द्र सरोवर फ्रेंड्स फोरम के मुकेश पारख, रतनलाल जोशी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ साहित्यकार बंशीधर शर्मा ने किया। विकास पंडित ने मंगलाचरण और नवीन व्यास ने दधीचि वंदना प्रस्तुत की। ट्रस्ट के मंत्री नारायण आसोपा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्था द्वारा संचालित समाजकल्याण कार्यों की जानकारी दी।

समारोह को सफल बनाने में सीताराम तिवाड़ी, बालकृष्ण आसोपा, बालकृष्ण ओझा, मालचंद बेहड़, देवकीनंदन शर्मा, विजय कुमार रतावा, हरीश आसोपा, आशाराम काकड़ा, सी.ए. परमानंद तिवाड़ी,

सुरेंद्र जोशी, हरिप्रसाद पलोड़, अशोक कुमार शर्मा, मुकेश पलोड़, किशन गोपाल, इंद्र काकड़ा, रामदेव काकड़ा, पवन दायमा, बिमल दौलावत, बसंत शर्मा, अनुपमा आसोपा, संगीता दाधीच और मीनू सूंटवाल सहित अन्य सदस्यों का सक्रिय सहयोग रहा।

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