कोलकाता पुलिस कमिश्नर के समक्ष आत्मसमर्पण करते हुए माओवादी दंपति
कोलकाता पुलिस कमिश्नर के समक्ष आत्मसमर्पण करते हुए माओवादी दंपति

7 लाख रुपये के इनामी माओवादी दंपति ने किया आत्मसमर्पण

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लालबाजार में कोलकाता पुलिस कमिश्नर के समक्ष किया सरेंडर

दीपक, सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता :

झारखंड के सारंडा के जंगलों में लंबे समय तक सक्रिय रहे और कई माओवादी गतिविधियों में शामिल रहे एक माओवादी दंपति ने कोलकाता पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। शुक्रवार की सुबह इस दंपति (मंगल और मालती) ने कोलकाता पुलिस कमिश्नर अजय नंद के समक्ष अपनी एके-47 और इंसास राइफलें जमा कर दीं। मंगल और मालती दोनों ही पश्चिम बंगाल के मूल निवासी हैं। मंगल का घर पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले के शालबनी में है, जबकि मालती झाड़ग्राम के गोपीबल्लवपुर की रहने वाली थीं। बाद में दोनों झारखंड में सक्रिय हो गए। मंगल ने पहले दलमा क्षेत्र और उसके बाद सारंडा में माओवादी गतिविधियों में हिस्सा लिया। कुछ समय बाद मालती भी झाड़ग्राम छोड़कर सारंडा चली गई थीं।पुलिस के मुताबिक, सारंडा में टिकना मुश्किल होने के कारण साल 2026 में माओवादियों ने उस इलाके को छोड़ना शुरू कर दिया था। इस सूची में पश्चिम बंगाल के लगभग 13 लोग शामिल थे, जो अलग-अलग समय पर विभिन्न जगहों से गिरफ्तार हुए। हाल ही में झारखंड से तीन लोग गिरफ्तार किए गए थे। कुछ महीने पहले पुष्पा नाम की माओवादी ने कोलकाता में आत्मसमर्पण किया था, जबकि बेला को गिरफ्तार किया गया था। अब मंगल और मालती ने भी कोलकाता पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है।

किशनजी के थे करीबी, घोषित था इनाम

पुलिस कमिश्नर अजय नंद ने बताया कि मंगल 2011-12 के बाद झारखंड चला गया था। उससे पहले, साल 2010 में वह माओवादी संगठन में शामिल हुआ था। उस समय शालबनी में ''''जनसाधारण कमेटी'''' सक्रिय थी। पुलिस कमिश्नर ने यह भी बताया कि आत्मसमर्पण करने वाला यह माओवादी नेता कुख्यात माओवादी नेता किशनजी के बेहद करीब था। पुलिस के अनुसार, दोनों मुख्य रूप से सारंडा क्षेत्र में सक्रिय थे। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, झारखंड में मंगल के खिलाफ 6-7 मामले दर्ज हैं। झारखंड पुलिस ने मंगल पर 5 लाख रुपये और मालती पर 2 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। शुक्रवार को दोनों एक एके-47 और एक इंसास राइफल लेकर पुलिस के सामने पेश हुए।आत्मसमर्पण के बाद मंगल ने कहा, \"सशस्त्र संघर्ष के जरिए समाज में बदलाव लाना संभव नहीं है। इसलिए हमने उस रास्ते को छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। इसी वजह से हमने यहां आकर पश्चिम बंगाल सरकार के सामने आत्मसमर्पण किया है। \" उल्लेखनीय है कि इससे पहले बीते जून महीने में माओवादी नेत्री पुष्पा उर्फ शकुंतला ने कोलकाता पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था। वह साल 2001 से माओवादी आंदोलन से जुड़ी थीं। उससे ठीक पहले, झारखंड की वरिष्ठ माओवादी नेत्री श्रद्धा विश्वास उर्फ बेला को कोलकाता पुलिस ने उत्तर काशीपुर इलाके से गिरफ्तार किया था।
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