5 साल पुराने जुल्मों का होगा हिसाब, नहीं चलेगा सिंडिकेट राज

अब शासक नहीं, कानून का राज चलेगा-सीएम
संवाददाताओं को सबोधित करते मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी
संवाददाताओं को सबोधित करते मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी
Published on

कोलकाता : पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शनिवार को राज्य के शीर्ष पुलिस अधिकारियों के साथ अपनी पहली प्रशासनिक समीक्षा बैठक के बाद बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि अब राज्य के सभी थानों को पिछले पांच वर्षों तक के कथित पुलिसिया अत्याचार और राजनीतिक हिंसा से जुड़े मामलों की शिकायतें स्वीकार करनी होंगी। डायमंड हार्बर में आयोजित बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि राजनीतिक हिंसा, पुलिस बर्बरता, महिलाओं के खिलाफ उत्पीड़न तथा सरकारी योजनाओं में कथित ‘कटमनी’ वसूली के पीड़ित अब नये सिरे से एफआईआर दर्ज करा सकेंगे। उन्होंने कहा, ‘पिछले पांच वर्षों में राजनीतिक हिंसा के शिकार लोग नई एफआईआर दर्ज करा सकते हैं। कई लोगों ने आरोप लगाया है कि उन्हें कई दिनों तक हिरासत में रखकर पीटा गया। ऐसे मामलों की शिकायतें अब पुलिस थानों में स्वीकार की जाएंगी।’ मुख्यमंत्री ने इसे पुलिस व्यवस्था में जवाबदेही स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि जिन महिलाओं की शिकायतें पहले दर्ज नहीं की गईं या मामलों को दबाने का प्रयास हुआ, वे भी दोबारा शिकायत दर्ज करा सकेंगी। हालांकि मुख्यमंत्री ने झूठी शिकायतों को लेकर चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर फर्जी आरोप लगाएगा तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

‘अब बंगाल में कानून का राज होगा’

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में अब “शासकों का नहीं, कानून का राज” स्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा, “आज से ऑटो चालकों, टोटो चालकों और फुटपाथ दुकानदारों से अवैध वसूली नहीं होगी। बिना आधिकारिक रसीद के कोई टोल नहीं दिया जाएगा। यदि कोई पैसे मांगता है तो लोग सीधे थाने में शिकायत करें।”

पुलिस वेलफेयर बोर्ड किया गया भंग

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने पुलिस वेलफेयर बोर्ड को भंग करने की घोषणा भी की। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बोर्ड अपने मूल उद्देश्य से भटककर राजनीतिक संगठन की तरह काम करने लगा था। उन्होंने कहा, “बोर्ड अच्छे उद्देश्य से बनाया गया था, लेकिन बाद में यह एक राजनीतिक मोर्चे में बदल गया। इससे कुछ लोगों को अवैध सेवा विस्तार का लाभ मिला। इसलिए आज इसे भंग किया जा रहा है।” मुख्यमंत्री ने बताया कि सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों से सलाह लेकर तीन महीने के भीतर नई व्यवस्था बनाई जा सकती है। इस संबंध में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति गठित की जाएगी और गृह सचिव सोमवार को आधिकारिक आदेश जारी करेंगे।

‘पुलिस व्यवस्था में अनुशासन खत्म हो गया था’

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के दौरान प्रशासनिक अनुशासन और पुलिस व्यवस्था की श्रृंखला कमजोर हो गई थी। उन्होंने कहा, ‘कई बार पुलिस मंत्री के निजी कर्मचारियों के निर्देश पर काम करती थी और एसपी तक को जानकारी नहीं होती थी। थाने राजनीतिक निर्देशों पर चल रहे थे। अब यह व्यवस्था बदलेगी।’ उन्होंने यह भी कहा कि अगले एक महीने तक फैसलों के क्रियान्वयन की लगातार निगरानी की जाएगी और डीजीपी से लेकर जमीनी स्तर के अधिकारियों तक निर्देश पहुंचाए जाएंगे।

महिलाओं की पोस्टिंग पर भी जोर

मुख्यमंत्री ने महिला पुलिसकर्मियों की पोस्टिंग को लेकर भी महत्वपूर्ण सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि महिला कर्मियों को संभव हो तो उनके घर के नजदीकी क्षेत्रों में तैनात किया जाए। साथ ही 15 वर्ष सेवा पूरी कर चुके कर्मियों को गृह जिले में पोस्टिंग देने की संभावना भी जांची जाए।

प्रशासनिक बैठकों में नहीं होगी राजनीति

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार में प्रशासनिक बैठकों को राजनीतिक मंच नहीं बनने दिया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘बैठकों में अधिकारियों को नाम लेकर राजनीतिक भाषण देना स्वीकार नहीं होगा। अधिकारी प्रशिक्षित पेशेवर हैं।’ बैठक की अध्यक्षता डीजीपी सिद्धनाथ गुप्ता की मौजूदगी में हुई। इसमें मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल और गृह सचिव सहित राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े। दक्षिण 24 परगना, डायमंड हार्बर, सुंदरबन और बारुईपुर के अधिकारी बैठक में प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित थे।

logo
Sanmarg Hindi daily
sanmarg.in