

आसपास के नामी आवासन में बैठकर अमरीकी नागरिकों से करोड़ों रुपये की ठगी करनेवाले गिरोह का कोलकाता पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। कोलकाता पुलिस के साइबर क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने मामले में गिरोह के मास्टमाइंड सहित 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। ये लोग अवैध कॉल सेंटर की आड़ में ठगी का कारोबार चला रहे थे। अभियुक्तों के नाम शरीम रजा, संदीप चौधरी, अंकित प्रदीप, नजीस अहमद और मो.असिफ अख्तर हैं। अभियुक्तों के पास से 12 लैपटॉप, 8 मोबाइल सहित अन्य दस्तावेज जब्त किये गये हैं। गुरुवार को अभियुक्तों को अदालत में पेश करने पर उन्हें 9 फरवरी तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस ने अभियुक्तों को नारकेलडांगा और विष्णुपुर थाना इलाके से पकड़ा है।
क्या है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार कोलकाता पुलिस के साइबर क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने गुप्त सूचना के आधार पर नारकेलडांगा थानांतर्गत एपीसी रोड स्थित एक नामी आवासन में छापामारी की। वहां से पुलिस नेे शरीम रजा नामक युवक को गिरफ्तार किया। पुलिस ने जांच में पाया कि शरीम कोलकाता में एक कॉल सेंटर का मास्टरमाइंड है। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने विष्णुपुर इलाके में छापामारी कर एक फ्लैट से 4 युवकों को गिरफ्तार किया। वहां से पुलिस ने कई लैपटॉप सहित अन्य दस्तावेज बरामद किये। जांच में पता चला कि जालसाज खुद को पेपाल का ग्राहक और तकनीकी सहायता अधिकारी बताकर ठगी करते थे। आरोपित एक अवैध कॉल सेंटर का संचालन कर रहे थे और अमेरिका में विभिन्न वेब प्लेटफॉर्म व सोशल मीडिया चैनलों पर पेपाल के आधिकारिक कस्टमर केयर और टेक्निकल सपोर्ट नंबर बताकर फर्जी कांटेक्ट नंबर प्रसारित कर रहे थे।
जानकारी के अनुसार, जब अमेरिकी नागरिक इन नंबरों पर माइक्रोसॉफ्ट टीम्स के माध्यम से संपर्क करते थे, तो आरोपित खुद को पेपाल के ग्राहक या तकनीकी सहायता अधिकारी के रूप में पेश करते थे। तकनीकी सहायता देने का झांसा देकर वे पीड़ितों को टीमव्यूअर, अल्ट्राव्यूअर और एनीडेस्क जैसे रिमोट एक्सेस एप्लिकेशन इंस्टॉल करने के लिए प्रेरित करते थे। इन एप्लिकेशनों के माध्यम से आरोपित पीड़ितों के कंप्यूटर सिस्टम तक अनधिकृत पहुंच हासिल कर लेते थे और इसके बाद उनके पेपाल खातों में प्रवेश कर धोखाधड़ी से धनराशि निकाल लेते थे। निकाली गई रकम को गिरोह के नियंत्रण में मौजूद विदेशी बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट्स में ट्रांसफर किया जाता था।
अपनी असली पहचान और लोकेशन छिपाने के लिए आरोपित एक्सप्रेस वीपीएन सहित अत्याधुनिक वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन) का इस्तेमाल कर रहे थे। इसके अलावा, पीड़ितों को गुमराह करने के लिए पेपाल तथा अमेरिका की विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं के नाम से जारी फर्जी और मनगढ़ंत इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों का भी उपयोग किया जाता था।