विश्वविद्यालय विधेयकों पर राज्यपाल से हस्तक्षेप की गुहार

16 शिक्षक संगठन एक सप्ताह में देंगे संयुक्त अपील, विधेयक रद्द करने की मांग
फ़ाइल फोटो
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कोलकाता : विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर कथित हमले के आरोप में राज्य के 16 विश्वविद्यालय शिक्षक संगठन अब राज्यपाल एवं कुलाधिपति आर. एन. रवि के हस्तक्षेप की मांग करेंगे। शनिवार को प्रेस क्लब में संयुक्त पत्रकार वार्ता में संगठनों ने कहा कि वे एक सप्ताह के भीतर राज्यपाल को संयुक्त अपील सौंपकर 10 सितंबर को विधानसभा से पारित दोनों विश्वविद्यालय विधेयकों को रद्द करने और उन्हें लागू नहीं करने का आग्रह करेंगे।

शिक्षक संगठनों के अनुसार, ‘पश्चिम बंगाल विश्वविद्यालय एवं कॉलेज (नियंत्रण एवं संचालन) (विशेषाधीन) विधेयक, 2026’ और ‘पश्चिम बंगाल विश्वविद्यालय एवं कॉलेज प्रशासन एवं नियंत्रण (विशेषाधीन) विधेयक, 2026’ विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता, लोकतांत्रिक चरित्र और अकादमिक स्वतंत्रता को कमजोर करेंगे। खासकर एक विश्वविद्यालय के शिक्षक-कर्मचारी को दूसरे विश्वविद्यालय में तबादले के प्रावधान पर संगठनों ने कड़ी आपत्ति जतायी।

WBCUTA के प्रो. शुभोदय दासगुप्ता समेत शिक्षक प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि तबादले की स्पष्ट नीति के बिना यह प्रावधान प्रशासनिक दबाव का माध्यम बन सकता है। जादवपुर विश्वविद्यालय के पार्थ प्रतिम राय ने कहा कि विधेयक शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के बजाय विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर सवाल खड़ा करता है। कोलकाता विश्वविद्यालय की प्रो. महालया चट्टोपाध्याय ने शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाया। शोधार्थी प्रतिनिधि परिपूर्णा मजुमदार ने कहा कि शोध-निर्देशक के तबादले से शोध की निरंतरता प्रभावित होगी।

शिक्षक संगठनों ने कहा कि राज्यपाल से हस्तक्षेप के साथ कानूनी विकल्प भी तलाशे जाएंगे। मांग नहीं मानी गयी तो शिक्षा सम्मेलन, विश्वविद्यालय स्तर पर विरोध और सड़क पर आंदोलन शुरू किया जाएगा। साथ ही रिक्त पदों पर नियुक्ति, बुनियादी ढांचे के लिए धन, उपाचार्यों की नियुक्ति और नए विश्वविद्यालयों के लिए विशेष वित्तीय पैकेज की मांग उठायी गयी।

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