अभियुक्त असीम मंडल
अभियुक्त असीम मंडल

1 करोड़ रुपए का इनामी माओवादी नेता असीम मंडल गिरफ्तार

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कोलकाता पुलिस के एसटीएफ ने पोलेरहाट इलाके से पकड़ा अभियुक्त को

अभियुक्त के पास से 95 हजार नकद व डिजिटल सामग्री बरामद

सन्मार्ग संवाददाता

कोलकाता

: कोलकाता पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स ने एक बड़े अभियान में पोलेरहाट इलाके से कुख्यात सीपीआई (माओवादी) नेता असीम मंडल उर्फ आकाश को गिरफ्तार कर लिया है। उसके पास से लगभग 95 हजार रुपये नकद, कई पेन ड्राइव, मेमोरी चिप्स, महत्वपूर्ण दस्तावेज और पत्र बरामद किए गए हैं। कोलकाता पुलिस आयुक्त

अजय नंद

ने बताया कि झारखंड में अपने साथियों की गिरफ्तारी के बाद असीम मंडल सुरक्षित ठिकाने की तलाश में बंगाल आया था। झारखंड सरकार ने उस पर 1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। असीम मंडल को मारे गए माओवादी कमांडर किशनजी का बेहद करीबी माना जाता था। वह 2012 के बाद झारखंड चला गया था और वहीं से अपनी गतिविधियां चला रहा था। वह हत्या और माओवादी हिंसा के कई गंभीर मामलों में आरोपी है। जांच अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल छापेमारी में कोई हथियार बरामद नहीं हुआ है। जांचकर्ताओं का दावा है कि झारखंड पुलिस रिकॉर्ड में उसके और उसके साथियों के खिलाफ कम से कम 17 से अधिक मामले दर्ज हैं। वहीं बंगाल में असीम के खिलाफ करीब 12 आपराधिक मामले दर्ज हैं।

80 के दशक से माओवादियों गतिविधियों में शामिल था अभियुक्त

पश्चिम मिदनापुर जिले के चंद्रकोना थाना अंतर्गत फुलचक का रहने वाला असीम मंडल उर्फ आकाश 80 के दशक में अपने छात्र जीवन से ही चरम वामपंथी गतिविधियों में शामिल हो गया था। बाद में, वह पीडब्लूजी का सदस्य बन गया। उस समय उसने बंगाल के सारेंगा और ग्वालतोड़ इलाकों के साथ-साथ पड़ोसी झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के गुराबंडा इलाके में भी संगठन में लंबे समय तक काम किया। 21 सितंबर 2004 को सीपीआई (माओवादी) के गठन के बाद, वह जंगलमहल लौट आया और पूरे जोश के साथ काम करने लगा। उसने लालगढ़ आंदोलन में भी अहम भूमिका निभाई। नतीजतन, उसे 2010 में पश्चिम बंगाल राज्य कमेटी के सचिव की जिम्मेदारी दी गई। उसके कंधों पर बंगाल-झारखंड-ओडिशा क्षेत्रीय कमेटी की भी अहम जिम्मेदारियां थीं। हालांकि, किशनजी की मौत के बाद वह जंगलमहल से झारखंड चले गया।

सारंडा जंगल से निकलकर बंगाल की ओर रुख

पुलिस के अनुसार, साल 2012 के बाद पश्चिम बंगाल में इस समूह की सक्रियता न के बराबर रह गई थी और असीम मंडल समेत इसके कई सदस्य झारखंड के सारंडा जैसे जंगलों में जाकर छिप गए थे। हालांकि, 15 साल के लंबे समय बाद पार्टी में लौटने के दौरान, 4 अगस्त को झारखंड पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया। एक ने आत्मसमर्पण कर दिया। हालांकि, उन सभी ने पुलिस को बताया कि आकाश किसी भी हालत में आत्मसर्मपण नहीं करेगा। जांच में यह बात भी सामने आ रही है कि इस समूह का संबंध जंगलमहल क्षेत्र में पूर्व में हुए माओवादी हमलों, हत्याओं और हिंसा की घटनाओं से रहा है।

छिपने के मकसद से आया था आरोपी

पुलिस का दावा है कि आरोपी के बंगाल आने के पीछे किसी नई बड़ी साजिश या नए सदस्यों की भर्ती का प्राथमिक प्रमाण नहीं मिला है। शुरुआती जांच के मुताबिक, झारखंड में पुलिस का दबाव बढ़ने के कारण वह केवल महफूज ठिकाने की तलाश में यहां पहुंचा था। पुलिस लगातार उसकी गतिविधियों पर नजर रखे हुए थी कि वह किससे मिल रहा है और कहां ठहर रहा है।फिलहाल जब्त किए गए डिजिटल डिवाइस और पत्रों से इस पूरे नेटवर्क की अगली कड़ियों का पता लगाया जा रहा है।
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