

चुन्नू खरगोश स्कूल से घर लौटा और बस्ता रख कर सीधा रसोई में मां के पास गया। वह मां से सकुचाता हुआ बोला, ’मां, आज डंपी का जन्मदिन है। उसने आज शाम को मुझे भी अपने घर पर आमंत्रित किया है।‘
’तो शाम को चले जाना‘, मां उस के लिए नाश्ता निकालती हुई बोली।
’क्या वहां मैं खाली हाथ जाऊंगा,‘ चुन्नू ने कुछ सोचते हुए कहा, ’डंपी के जन्मदिन पर उसके सारे दोस्त कीमती तोहफे लाएंगे। मुझे भी उसके लिए एक कीमती उपहार खरीदना होगा। मुझे उपहार खरीदने के लिए पैसे चाहिए‘।
’पहले तुम हाथ-मुंह धोकर नाश्ता कर लो, इसके बाद मैं देखती हूं,‘ मां टेबल पर नाश्ता रखती हुई बोली।
चुन्नू ने हाथ-मुंह धोकर जल्दी से नाश्ता किया। फिर मां के आगे पैसे के लिए हाथ फैला दिए। उसे पैसे देने के बजाए मां समझाती हुई बोली, ’बेटा, संबंधों की मजबूती और मधुरता के लिए उपहार दिए जाते हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि अपनी औकात से बढ़कर खूब महंगे उपहार दिए जाएं।‘
’लगता है तुम मुझे पैसे नहीं देना चाहती हो, इसलिए ऐसी बातें कह रही हो‘ चुन्नू ने सशंकित हो कर कहा।
’ऐसी बात नहीं है बेटा,‘ मां उसे फिर से समझाती हुई बोली, ’किसी भी दोस्त को तुम अगर कोई कीमती उपहार भेंट करते हो और उसमें दिखावापन है तो यह उपहार व्यर्थ है। इसलिए दिखावे से बचते हुए दोस्त को उसके जन्मदिन पर ऐसा उपहार भेंट करो जो एक स्थायी और यादगार उपहार साबित हो।‘
चुन्नू की समझ में मां की बात आने लगी। उसने कहा, ’ठीक है मां, तुम ही बताओ कि मुझे डंपी के जन्मदिन पर क्या उपहार देना चाहिए ?‘
’मेरे दिमाग में एक अनोखे उपहार का आइडिया आया है बेटे,‘ मां कुछ सोचकर बोली, ’अगर तुम उस उपहार को ले जा कर अपने दोस्त को भेंट दोगे तो मुझे पूरा विश्वास है कि उसे यह जरूर पसंद आएगा। वह तुम्हारे उपहार की खूब प्रशंसा करेगा।
’मां, तुम पहेलियां मत बुझाओ,‘ चुन्नू उतावलेपन से बोला, ‘जल्दी बताओ न, क्या है वह उपहार ?‘
मां ने उसे उस उपहार के बारे में बताते हुए कहा, ’गर तुम कहो तो मैं उपहार तैयार करने में तुम्हारी मदद कर सकती हूं।‘
’ठीक है मां‘ उसने अपनी सहमति दे दी।
’तो चलो अपने बगीचे में चलें‘ यह कह कर मां उसे बगीचे में ले गई जहां रंगबिरंगे खूबसूरत फूलों के पौधे क्यारियों में लगे हुए थे। मां ने लाल गुलाबों से लदे एक पौधे को लिया और उसे एक सुंदर गमले में मिट्टी और खाद डाल कर अच्छी तरह लगा दिया।
’मां, इस गमले को रंगीन कागज से सजा देने से यह बहुत खूबसूरत नजर आएगा।‘ चुन्नू ने खुश हो कर कहा।
’तुम ठीक कहते हो‘।
चुन्नू दौड़ कर अपने बस्ते में से रंगीन कागज ले आया। गमले को चारों तरफ रंगीन कागज से सजाने के बाद चुन्नू ने पौधे पर हाथ से लिखकर शुभकामनाओं की एक चिट भी लगा दी। ’सच मां,‘ चुन्नू खुश होता हुआ बोला, ’यह अनोखा उपहार डंपी को जरूर पसंद आएगा।‘
चुन्नू अपने उपहार के साथ डंपी के घर पहुंचा तो वहां उसके सारे दोस्त उपस्थित थे। बड़े से हाल को खूब सजाया गया था। हाल के बीचांेबीच एक मेज पर एक सुंदर सा केक रखा हुआ था जिस पर 12 रंगबिरंगी मोमबत्तियां जल रही थीं। पास ही एक और बड़े मेज पर ढेर सारे कीमती उपहार रखे हुए थे। जो डंपी के दोस्त लाए थे। उन कीमती उपहारों को देखकर चुन्नू का मन बुझ गया। उसे अपना उपहार बहुत मामूली सा लग रहा था। अपना उपहार ले कर आगे बढ़ने में उसे बड़ी शरम आ रही थी। तभी स्वयं डंपी उसका उपहार देख कर खुशी से आगे बढ़ा और बोला, ’अरे वाह, कितना सुंदर उपहार है।‘
’वाकई, बहुत सुंदर उपहार है‘ सारे दोस्त भी एक साथ बोले। यह सुनकर चुन्नू ने आगे बढ़कर डंपी को अपना उपहार भेंट करते हुए कहा, ’तुम्हें जन्मदिन बहुत-बहुत मुबारक हो दोस्त।‘
चुन्नू से उपहार ले कर डंपी ने पहले चूमा और फिर उसे मेज पर ले जा कर रख दिया। इसके बाद चुन्नू के पास वापस आ कर उसने कहा, ’तुम्हारा उपहार मुझे बहुत पसंद आया दोस्त। मैं उसे अपने कमरे में रखूंगा।‘
अपने उपहार के प्रति डंपी का प्यार देख कर चुन्नू बहुत खुश हुआ। उसने अपनी मां का मन ही मन शुक्रिया अदा किया। उसकी मां ने इस अनोखे उपहार का आइडिया दे कर उसे प्रशंसा का पात्र बना दिया था। (उर्वशी)हेमंत यादव