

मंडल कारा परिसर स्थित शिव मंदिर में शुक्रवार को एक अनोखा मामला सामने आया, जब कोर्ट मैरिज कर चुके एक जोड़े की पारंपरिक शादी की रस्में बीच में ही रोक दी गईं। बिना प्रशासनिक अनुमति के आयोजन होने पर जेल प्रशासन ने हस्तक्षेप करते हुए कार्यक्रम को तत्काल बंद करा दिया।
जानकारी के अनुसार, बिहार के आरा निवासी दिलीप यादव और धनबाद के पाथरडीह की रहने वाली कंचन का पहले ही कानूनी रूप से विवाह (कोर्ट मैरिज) हो चुका था। इसके बाद दोनों परिवार हिंदू रीति-रिवाजों से विवाह की शेष रस्में पूरी करना चाहते थे। इसी उद्देश्य से वे धनबाद मंडल कारा परिसर स्थित शिव मंदिर पहुंचे। मंदिर में विधिवत तैयारी के साथ पुरोहित की मौजूदगी में विवाह की रस्में शुरू भी हो चुकी थीं। जैसे ही इसकी जानकारी जेल प्रशासन को मिली, अधिकारी और पुलिस मौके पर पहुंचे। जांच में पता चला कि आयोजन के लिए कोई पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी। नियमों के अनुसार जेल परिसर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सार्वजनिक या निजी कार्यक्रम बिना अनुमति आयोजित नहीं किया जा सकता।
मामले की जानकारी मिलने के बाद जेलर दिनेश प्रसाद वर्मा ने जांच के निर्देश दिए। नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होते ही विवाह समारोह को तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया। प्रशासन ने मौके पर मौजूद लोगों को नियमों के पालन की सख्त हिदायत भी दी। दूल्हा दिलीप यादव और दुल्हन कंचन ने बताया कि वे एक वकील की सलाह पर मंदिर में रस्में पूरी करने आए थे, लेकिन उन्हें अनुमति की अनिवार्यता की जानकारी नहीं थी। उन्होंने प्रशासन के फैसले को स्वीकार करते हुए आगे की रस्में किसी अन्य स्थान पर पूरी करने की बात कही। घटना के बाद दूल्हा-दुल्हन और उनके परिजन बिना विवाह पूरा किए वापस लौट गए। परिजनों ने बताया कि अब शेष वैवाहिक संस्कार किसी अन्य मंदिर में संपन्न कराए जाएंगे।