ट्रेजरी घोटाला : CID जांच पर BJP ने उठाए सवाल

CID जांच पर भरोसा जताने से इंकार, BJP ने सरकार पर घोटाले को दबाने का लगाया आरोप
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रांची : झारखंड प्रदेश BJP ने राज्य के कथित ट्रेजरी घोटाले को लेकर हेमंत सोरेन सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी की प्रदेश इकाई के मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने सोमवार को कहा कि सरकार झारखंड कोषागार संहिता, 2016 और वित्तीय नियमों के विपरीत अपने चहेते अधिकारियों को बचाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि CID इस मामले में निष्पक्ष जांच करने के बजाय सरकार की ‘एजेंसी ऑफ चॉइस’ बन गई है।

शाहदेव ने कहा कि राज्य के वित्त मंत्री स्वयं स्वीकार कर चुके हैं कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान करीब 10 हजार करोड़ रुपये के सरकारी धन का हिसाब नहीं मिल रहा है। इसके बावजूद जांच में बड़े अधिकारियों को बचाया जा रहा है और केवल निचले स्तर के कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। BJP शुरू से आशंका जताती रही है कि सरकार अपने पसंदीदा अधिकारियों को बचाने में लगी है।

उन्होंने कहा कि ट्रेजरी घोटाले की जांच के लिए गठित एसआईटी में ऐसे अधिकारियों को शामिल किया गया, जो उन जिलों में पुलिस अधीक्षक रह चुके थे, जहां कथित घोटाले से संबंधित चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। ऐसे अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती।

BJP प्रवक्ता ने कहा कि चारा घोटाले के मामलों में CBI अदालत ने ट्रेजरी अधिकारियों की भूमिका को भी दोषी मानते हुए सजा सुनाई थी, जिसे बाद में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा। वर्तमान मामले में CID ने आरोपपत्र दाखिल करते समय डीडीओ और ट्रेजरी अधिकारियों को क्लीनचिट दे दी, जबकि झारखंड वित्त नियमावली और झारखंड कोषागार संहिता में सरकारी धन की निकासी के संबंध में उनकी स्पष्ट जिम्मेदारी तय की गई है।

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उन्होंने कहा कि झारखंड वित्त नियमावली की विभिन्न धाराओं तथा झारखंड कोषागार संहिता, 2016 के प्रावधानों के अनुसार डीडीओ और ट्रेजरी अधिकारियों का दायित्व है कि वे बिल, दस्तावेजों और हस्ताक्षरों की वैधता की जांच करें तथा किसी भी संदेह की स्थिति में भुगतान रोककर जांच करें। इसके बावजूद सीआईडी ने उन्हें जांच के दायरे से बाहर रखा है।

BJP प्रवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि चाईबासा ट्रेजरी घोटाले में भी CID ने केवल निचले स्तर के कर्मचारियों को आरोपी बनाया जबकि वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की अनदेखी की गई। उन्होंने कहा कि राज्य में जिन मामलों की लीपापोती करनी होती है, उन्हें CID के हवाले कर दिया जाता है।

शाहदेव ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने ट्रेजरी घोटाले की विशेष ऑडिट के लिए आवश्यक दस्तावेज भी समय पर उपलब्ध नहीं कराए। उन्होंने कहा कि प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल ने 11 मई 2026 को गृह विभाग की अपर मुख्य सचिव से 87 प्रकार के दस्तावेज मांगे थे लेकिन ढाई महीने बीत जाने के बाद भी सरकार ने उन्हें उपलब्ध नहीं कराया। उत्पाद सचिव के नेतृत्व में गठित SIT ने भी अब तक अपनी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की है।

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