

नयी दिल्ली/ रांची : सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा (JPSC) में कथित गड़बड़ियों की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराने का अनुरोध करने वाली याचिका पर केंद्र और झारखंड सरकार को सोमवार को नोटिस जारी किए।
भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने केंद्र सरकार, झारखंड सरकार, झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और अन्य से जवाब मांगा।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि याचिका में मामले की सीबीआई जांच या सुप्रीम कोर्ट के किसी पूर्व न्यायाधीश से जांच कराने का अनुरोध किया गया है।
शीर्ष अदालत ने कार्यकर्ता हरिशरण देवगन की ओर से अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किए।
याचिका में कहा गया है, भारत के संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत यह रिट याचिका जनहित में दायर की गई है, जिसमें झारखंड लोक सेवा आयोग द्वारा विज्ञापन संख्या 01/2026 के तहत 19 अप्रैल 2026 को आयोजित झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा प्रारंभिक प्रतियोगी परीक्षा 2025 की शुचिता, निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर गंभीर चिंताओं के मद्देनजर इस न्यायालय से तत्काल हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया गया है।
याचिका में सार्वजनिक अधिकारियों और परीक्षा कराने वाली एजेंसियों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए मामले की जांच राज्य के अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी) से सीबीआई को सौंपे जाने का भी अनुरोध किया गया है।
याचिकाकर्ता ने कहा कि इस विवाद को केवल कुछ अभ्यर्थियों से जुड़े मामले या कथित गड़बड़ी की अलग-अलग घटनाओं के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
याचिका में कहा गया है, आरोपों की जांच के लिए पूरी परीक्षा प्रक्रिया की पड़ताल जरूरी है। इसमें प्रश्नपत्र तैयार करने और उनकी छपाई, कोडिंग, भंडारण, परिवहन, वितरण, परीक्षा के आयोजन, ओएमआर शीट एकत्र करने और उन्हें सुरक्षित रखने, उनकी स्कैनिंग, कोडिंग और डिकोडिंग, मूल्यांकन, इलेक्ट्रॉनिक परीक्षा डेटा के भंडारण और उस तक पहुंच, परिणाम तैयार करने और उसे प्रकाशित करने की प्रक्रिया शामिल है।
याचिका में यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि छेड़छाड़ रोकने के लिए मूल ओएमआर शीट, अभ्यर्थियों के पास मौजूद उनकी कार्बन प्रतियां, सीसीटीवी फुटेज और ‘सर्वर ऑडिट लॉग’ समेत सभी भौतिक और डिजिटल साक्ष्य तत्काल सुरक्षित किए जाएं।
इसमें कहा गया, मुख्य अनुरोध यह है कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो से स्वतंत्र, निष्पक्ष, व्यापक और समयबद्ध जांच कराई जाए ताकि कथित अनियमितताओं की प्रकृति, उसके दायरे, तरीके और उनके प्रभाव का पता लगाया जा सके।