

नयी दिल्ली/ रांची : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बुधवार को राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज धन शोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा जारी समन की जानबूझकर अवहेलना करने से संबंधित मुकदमे की सुनवाई पर रोक लगा दी।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने सोरेन की उस याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय को नोटिस जारी की जिसमें उन्होंने मामले को रद्द करने का अनुरोध किया है।
सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में सोरेन ने अवैध ‘स्टोन-चिप’ खनन घोटाले से जुड़े धन शोधन मामलों में ED द्वारा बार-बार जारी किए गए समन को भी चुनौती दी। सोरेन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी, अरुणभ चौधरी और अधिवक्ता प्रज्ञा बघेल ने कहा कि ईडी उन्हें लगातार समन जारी कर रही है।
ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक ने कहा कि सोरेन को सात समन जारी किए गए थे, लेकिन वे एजेंसी के समक्ष पेश नहीं हुए। उन्होंने आगे कहा कि उनके खिलाफ मुकदमा लगभग पूरा हो चुका है और केवल एक गवाह की जांच बाकी है।
प्रधान न्यायाधीश कांत ने कौशिक से कहा, हम अखबार में पढ़ रहे थे कि आपने (ED) बहुत अधिक शिकायतें दर्ज कराई हैं। आपको उन शिकायतों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और अपनी ऊर्जा लगानी चाहिए। इससे आपको कुछ सकारात्मक परिणाम मिलेंगे।
न्यायमूर्ति बागची ने कहा, आपको प्रभावी अभियोजन पर ध्यान देना चाहिए। ये आतंक फैलाने वाले अभियोजन हैं। उद्देश्य पूरा हो चुका है। सोरेन ने झारखंड उच्च न्यायालय के हालिया फैसले को चुनौती दी है, जिसमें उनके खिलाफ मामला रद्द करने से इनकार कर दिया गया था।
पंद्रह जनवरी को उच्च न्यायालय ने ED द्वारा दायर एक शिकायत से जुड़े मामले में विशेष सांसद-विधायक अदालत द्वारा सोरेन के खिलाफ लिए गए संज्ञान को रद्द करने से इनकार कर दिया, जिससे झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के नेता को झटका लगा।
ED ने सोरेन के खिलाफ एक कथित अवैध ‘स्टोन-चिप’ खनन घोटाले में कथित संलिप्तता के संबंध में जारी किए गए समन के बावजूद अदालत में पेश न होने के लिए शिकायत दर्ज की थी। रांची स्थित विशेष सांसद-विधायक अदालत के न्यायाधीश ने पहले शिकायत का संज्ञान लिया था और सोरेन को अदालत में पेश होने के लिए समन जारी किया था।
ED ने विवादित शिकायत में आरोप लगाया कि सोरेन के खिलाफ दर्ज धन शोधन मामले की जांच के दौरान उन्हें धन शोधन रोकथाम अधिनियम, 2002 की धारा 50 के तहत छह समन और एक पत्र जारी किया गया था, जिसमें उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति की आवश्यकता थी।
यह आरोप लगाया गया था कि सोरेन किसी न किसी बहाने से निर्धारित तिथियों पर उपस्थित होने में विफल रहे और इस प्रकार उन्होंने जानबूझकर समन की अवहेलना की, जो भारतीय दंड संहिता की धारा 174 के तहत एक अपराध है।
उक्त शिकायत के आधार पर, रांची के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने चार मार्च, 2024 को अपराध का संज्ञान लिया और बाद में मामला रांची के विशेष सांसद-विधायक अदालत को स्थानांतरित कर दिया गया।
सोरेन ने इस मामले में अपने खिलाफ शुरू की गई संपूर्ण आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। JMM नेता ने तर्क दिया कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा संज्ञान लेने और उनके खिलाफ समन जारी करने का आदेश कानून की प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग है।
सोरेन की याचिका में कहा गया है, ED द्वारा दायर की गई पूरी शिकायत भ्रामक, निराधार और परेशान करने वाली है, और याचिकाकर्ता को परेशान करने, अपमानित करने और डराने-धमकाने के गुप्त उद्देश्य से दायर की गई है। यह सर्वविदित है कि आपराधिक कार्यवाही और आपराधिक न्यायालय की प्रक्रिया को उत्पीड़न और प्रतिशोध के साधन के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, विशेष रूप से केंद्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसी द्वारा।
सोरेन ने कहा कि उन्होंने उच्च न्यायालय के समक्ष यह तर्क दिया है कि समन की वैधता और वैधता को चुनौती देकर न्यायिक उपाय तलाशना, समन का जवाब न देने और/या समन से बचने के रूप में 'जानबूझकर चूक' नहीं माना जा सकता है।
उनकी याचिका में कहा गया है, यह सर्वविदित है कि न्यायिक उपचार और न्यायालय तक पहुंच का अधिकार एक मौलिक अधिकार है और भारतीय दंड संहिता की धारा 174 के तहत अपराध के लिए ईडी द्वारा शुरू किया गया अभियोजन कानून की प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग है।