

रांची : झारखंड सरकार ने 25 और 26 नवंबर को विधानसभा का दो दिवसीय विशेष सत्र बुलाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग की अपर मुख्य सचिव वंदना दादेल ने आधिकारिक तौर पर इस निर्णय की पुष्टि की।
इस विशेष सत्र का मुख्य उद्देश्य केंद्र सरकार द्वारा संशोधित खनन कानून और राज्य में चल रहे मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर विस्तृत चर्चा करना है। झारखंड का सत्तारूढ़ गठबंधन संसद द्वारा अगस्त में पारित 'खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम' (MMDR) और चुनाव आयोग के एसआईआर (SIR) का कड़ा विरोध कर रहा है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि इन दोनों विषयों के कारण राज्य में जो मौजूदा स्थिति पैदा हुई है, उस पर व्यापक और विस्तृत चर्चा की आवश्यकता है। इसी गंभीरता को देखते हुए यह संक्षिप्त लेकिन महत्वपूर्ण सत्र बुलाने का निर्णय लिया गया है।
राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने इस मामले पर वित्तीय चिंताएं जताई हैं। उनका कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा खनन कानून में किए गए संशोधनों से झारखंड को भारी वित्तीय नुकसान होने की आशंका है। खनिज समृद्ध राज्य होने के नाते झारखंड के राजस्व का एक बड़ा हिस्सा खनन क्षेत्र से आता है, इसलिए इस कानून के प्रभाव की समीक्षा बेहद जरूरी है।
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि विशेष सत्र के दौरान सभी जनप्रतिनिधि इन मुद्दों पर अपनी राय और भावनाएं व्यक्त करेंगे, जिसके अनुरूप राज्य सरकार भविष्य की रणनीति तय करेगी और आगे की कानूनी या प्रशासनिक कार्रवाई करेगी।
कुल मिलाकर, यह विशेष सत्र केंद्र और राज्य के बीच अधिकारों और वित्तीय हिस्सेदारी को लेकर जारी तनातनी के बीच बुलाया जा रहा है, जहां झारखंड सरकार जनहित और राज्य के वित्तीय संसाधनों की रक्षा के लिए एक साझा रुख अपनाने की तैयारी में है।