झारखंड में 8 लाख से अधिक राशन कार्ड रद्द होने की आशंका

सरकार की सख्ती से फर्जी व अपात्र लाभार्थियों पर कार्रवाई तेज, लाखों जरूरतमंदों के राशन पर संकट गहराने की आशंका
सांकेतिक तस्वीर
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रांची : झारखंड में 8 लाख से अधिक राशन कार्डधारियों के राशन कार्ड रद्द करने की आशंका है। राज्य सरकार ने ऐसे 8,02,685 कार्डधारियों की पहचान की है, जिन्होंने पिछले लगभग 6 महीने से लेकर एक साल या उससे भी अधिक समय से सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत राशन नहीं लिया है।

खाद्य आपूर्ति विभाग का मानना है कि इनमें बड़ी संख्या में निष्क्रिय या डुप्लीकेट हो सकते हैं। राज्यभर में व्यापक सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है। अब तक 4.61 लाख से अधिक कार्डधारियों का भौतिक सत्यापन किया जा चुका है। जिन लोगों का पता नहीं चल रहा है या जो लंबे समय से योजना का लाभ नहीं ले रहे हैं, उनके कार्ड रद्द किए जा सकते हैं।

सत्यापन के दौरान 21,750 डुप्लीकेट राशन कार्ड और 12,284 संदिग्ध कार्ड भी सामने आए हैं। पूर्वी सिंहभूम, गिरिडीह और पश्चिमी सिंहभूम में ऐसे मामलों की संख्या सबसे ज्यादा बताई जा रही है। झारखंड सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि अब राशन कार्ड में नया नाम जोड़ने के लिए आधार आधारित ई-केवाईसी और बायोमेट्रिक सत्यापन जरूरी होगा। बिना सत्यापन कोई नया नाम नहीं जोड़ा जाएगा।

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सरकार की ओर से ऐसे लोगों को भी चेतावनी दी गई है, जो आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद राशन योजना का लाभ ले रहे हैं। चार पहिया वाहन रखने वाले, पांच एकड़ या उससे अधिक जमीन के मालिक अथवा आयकर दाता लोगों से 30 जून तक स्वेच्छा से राशन कार्ड सरेंडर करने को कहा गया है। ऐसा नहीं करने पर जांच में पकड़े जाने पर वसूली की कार्रवाई की जा सकती है। दरअसल, सरकार का फोकस फर्जी और निष्क्रिय कार्ड हटाकर वास्तविक जरूरतमंदों को लाभ पहुंचाने पर है।

झारखंड में फिलहाल 5.50 लाख से अधिक नए राशन कार्ड और नाम जोड़ने के आवेदन लंबित हैं। विभाग का कहना है कि निष्क्रिय कार्ड हटने के बाद बड़ी संख्या में नए पात्र परिवारों को राशन योजना से जोड़ा जा सकेगा।

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