झारखंड : बोकारो डीएमएफटी में 631 करोड़ का घोटाला

बाबूलाल मरांडी ने लगाए गंभीर आरोप, उठाई ये बड़ी मांग
बाबूलाल मरांडी
बाबूलाल मरांडी
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रांची : झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने बोकारो जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) में धन के गबन का आरोप लगाया और उन्होंने अनियमितताओं की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच करवाने की मांग की।

नेता प्रतिपक्ष के साथ भाजपा की राज्य इकाई के प्रमुख की जिम्मेदारी संभाल रहे मरांडी ने आरोप लगाया कि बोकारो जिले में डीएमएफटी के फंड से विभिन्न उद्देश्यों के लिए वस्तुओं और उपकरणों की खरीद बाजार मूल्य से कई गुना अधिक दरों पर की गई।

मरांडी ने आरोप लगाया, बोकारो में 2024-25 और 2025-26 के दौरान डीएमएफटी फंड से 631 करोड़ रुपये निकाले गए। वस्तुओं और उपकरणों की आपूर्ति के लिए विभिन्न एजेंसियों को बाजार मूल्य से कई गुना अधिक भुगतान किया गया।

उन्होंने दावा किया कि डीएमएफटी फंड से 46 पंचायत भवनों के लिए जनरेटर सेट खरीदे गए। इनमें से प्रत्येक को 7.97 लाख रुपये की दर से खरीदा गया। इसके अलावा 31 जनरेटर सेट और भी खरीदे गए, जिनमें से प्रत्येक की कीमत 12.28 लाख रुपये थी।

मरांडी ने दावा किया, जब हमने बाजार में कीमत का सर्वेक्षण किया, तो पाया कि सर्वश्रेष्ठ कंपनियों के 15 केवीए जनरेटर की कीमत तीन लाख से चार लाख रुपये के बीच है। यह धन की लूट का एक छोटा सा उदाहरण है।

उन्होंने दावा किया कि इसी तरह 60 स्कूलों के लिए टैब खरीदे गए, जिनमें प्रत्येक यूनिट की कीमत 8.30 लाख रुपये बताई गई, जबकि बाजार मूल्य प्रति टैब सिर्फ 2.32 लाख रुपये है।

मरांडी ने यह भी दावा किया कि 1,666 आंगनवाड़ी केंद्रों के लिए 1.25 लाख रुपये प्रति डिजिटल मैट की दर से खरीदारी की गई, जबकि इनका अधिकतम बाजार मूल्य 7,614 रुपये है।

उन्होंने आरोप लगाया, दिलचस्प बात यह है कि उसी वस्तु को अगली बार खरीदने पर कीमत कई गुना बढ़ गई। मरांडी ने कहा, ‘हाई-मास्ट लाइट’, ‘एलईडी’ वैन, सौर ऊर्जा चालित पंप सेट, स्कूलों में ‘मॉड्यूलर किचन’ और ‘लाइटनिंग अरेस्टर’ जैसी अन्य वस्तुओं की खरीद व कार्य में भी इसी तरह की अनियमितताएं पाई गईं।

उन्होंने कहा, यह घोटाला केवल मुख्यमंत्री के इशारे पर ही संभव हो सकता है, क्योंकि कोई भी अधिकारी इतना निडर नहीं हो सकता। इसलिए, हम इस घोटाले की सीबीआई जांच की मांग करते हैं। यह जांच किसी राज्य सरकार की एजेंसी से नहीं कराई जानी चाहिए।

सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के प्रवक्ता मनोज पांडे ने कहा कि राज्य सरकार आरोपों की जांच कर रही है और जो भी जिम्मेदार होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पांडे ने कहा, डीएमएफटी फंड के प्रबंधन के लिए एक निगरानी समिति है।

इस समिति में स्थानीय सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि शामिल हैं। स्थानीय सांसद भाजपा से हैं। जब ऐसी घटना हो रही थी, तब वह क्या कर रहे थे ? क्या मरांडी भी अपनी पार्टी के सांसद पर आरोप लगा रहे हैं? उन्हें स्पष्टीकरण देना चाहिए।

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