

नयी दिल्ली/ रांची : सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार और अन्य के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के अनुरोध वाली केंद्र की उस याचिका को सुनवाई के लिए गुरुवार को सूचीबद्ध करने पर सहमति जतायी जिसमें वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी तदाशा मिश्रा को 30 दिसंबर, 2025 को झारखंड का पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नियुक्त किए जाने को चुनौती दी गई है, जबकि वह अगले ही दिन सेवानिवृत्त होने वाली थीं।
केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बुधवार को भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ से अनुरोध किया कि अवमानना याचिका को अन्य लंबित याचिकाओं के साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट में मिश्रा की डीजीपी के रूप में नियुक्ति से संबंधित अन्य याचिकाओं पर भी सुनवाई प्रस्तावित है। इन याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि उनकी नियुक्ति शीर्ष न्यायालय के दिशा-निर्देशों के विपरीत की गई। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि केंद्र की याचिका को भी बृहस्पतिवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।
वरिष्ठ अधिवक्ता और न्यायमित्र राजू रामचंद्रन ने इससे पहले सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि झारखंड की झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) सरकार द्वारा 30 दिसंबर, 2025 को मिश्रा को राज्य का डीजीपी नियुक्त करना इस न्यायालय के उस निर्देश का उल्लंघन था, जिसके अनुसार किसी अधिकारी के पदभार संभालने के समय उसकी कम से कम छह महीने की सेवा शेष होनी चाहिए। मिश्रा अगले दिन सेवानिवृत्त होने वाली थीं।
रामचंद्रन विभिन्न राज्यों द्वारा डीजीपी की नियुक्ति में अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं को लेकर उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के कथित उल्लंघन से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही पीठ की सहायता कर रहे हैं।
प्रकाश सिंह मामले में दिए गए महत्वपूर्ण फैसलों के तहत डीजीपी पद के लिए विचार किए जाने वाले अधिकारी की कम से कम छह महीने की सेवा शेष होनी चाहिए, ताकि पद पर स्थिरता और योग्यता सुनिश्चित की जा सके। मिश्रा को सेवानिवृत्ति से महज 24 घंटे पहले डीजीपी नियुक्त किए जाने से राज्य ने उन्हें प्रभावी रूप से दो वर्ष का सेवा विस्तार दे दिया।
प्रकाश सिंह मामले में 2006 के उच्चतम न्यायालय के फैसले और बाद के निर्देशों में कहा गया था कि किसी राज्य का डीजीपी राज्य सरकार द्वारा विभाग के तीन सबसे वरिष्ठ अधिकारियों में से चुना जाएगा। इन अधिकारियों का चयन संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा डीजीपी पद पर पदोन्नति के लिए उनके सेवाकाल, बहुत अच्छे सेवा रिकॉर्ड और पुलिस बल का नेतृत्व करने के लिए उनके अनुभव के आधार पर तैयार किए गए पैनल में किया गया हो।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि एक बार किसी व्यक्ति का इस पद के लिए चयन हो जाने के बाद, उसकी सेवानिवृत्ति की तारीख चाहे जो भी हो, उसका न्यूनतम कार्यकाल कम से कम दो वर्ष होना चाहिए।