झारखंड : CM सोरेन ने आदिवासियों से बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया

सरकार उनके वित्तीय बोझ को कम करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन व अन्य
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन व अन्य
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चाईबासा : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को आदिवासी समुदाय से अपने बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया और कहा कि सरकार उनके वित्तीय बोझ को कम करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।

पश्चिम सिंहभूम के सेरेंगसिया घाटी में आदिवासी जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिए 1837 में अंग्रेजों से लड़ते हुए अपने प्राणों की आहूति देने वाले पोटो हो के नेतृत्व में शहीद हुए आदिवासी नायकों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद एक जनसभा को संबोधित करते हुए सोरेन ने कहा कि सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक कमजोरी के कारण दशकों से आदिवासियों का शोषण किया गया है।

उन्होंने समुदाय के बच्चों में शिक्षा की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा, हमारी पिछड़ेपन और कमजोरी का कारण निरक्षरता थी।

मुख्यमंत्री ने ‘सावित्री बाई फुले किशोरी समृद्धि योजना’ और ‘गुरुजी क्रेडिट कार्ड’ जैसी राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इन योजनाओं का उद्देश्य गरीब माता-पिता के वित्तीय बोझ को कम करना है, ताकि उनके बच्चे बिना किसी रुकावट के अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।

उन्होंने कहा, सरकार ने गरीब छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने के लिए एक निःशुल्क आवासीय कोचिंग सेंटर भी शुरू किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा, हमारे समुदाय से एक भी न्यायाधीश क्यों नहीं है, जबकि हमारे कुछ वकील हो सकते हैं ? हमारी जमीनों पर कब्जा किया जा रहा है, इसलिए हमें ऐसे आदिवासी न्यायाधीशों की आवश्यकता है, जो छोटानागपुर और संथाल परगना काश्तकारी अधिनियमों को समझें और हमारी जमीनों की रक्षा करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिरसा मुंडा, सिदो-कान्हो, चांद भैरव और पोटो हो जैसे आदिवासी शहीदों ने आदिवासी हितों की रक्षा के लिए अंग्रेजों से लड़ते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया, और झारखंड का निर्माण उसी अनुरूप करना समुदाय की जिम्मेदारी है, जैसा उन लोगों ने कल्पना की थी।

रविवार को असम की अपनी यात्रा का जिक्र करते हुए सोरेन ने कहा कि उन्हें यह देखकर आश्चर्य हुआ कि देश के विभिन्न हिस्सों में उन्हीं आदिवासियों के साथ अलग-अलग व्यवहार किया जा रहा है।

उन्होंने दावा किया कि असम सरकार ने झारखंड, बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के सैकड़ों आदिवासियों को, जिन्हें दशकों पहले अंग्रेज बंदूक का डर दिखाकर चाय बागानों में काम करने के लिए ले गए थे, 'अन्य पिछड़ा वर्ग' के रूप में वर्गीकृत किया है, जबकि देश के अन्य हिस्सों में उन्हें अनुसूचित जनजाति के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

असम में आदिवासियों को राज्य सरकार द्वारा बार-बार प्रताड़ित किए जाने का आरोप लगाते हुए सोरेन ने कहा कि उन्होंने गरीब आदिवासियों के निमंत्रण पर पूर्वोत्तर राज्य का दौरा किया और उनकी दुर्दशा जानकर निराश हुए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस यात्रा से उन्हें यह समझने में मदद मिली कि उनके पिता और JMM प्रमुख शिबू सोरेन पूर्वोत्तर का दौरा क्यों करते थे और वहां के समुदाय को समर्थन क्यों देते थे। उन्होंने आश्वासन दिया कि झारखंड के आदिवासी उनके संघर्ष में उनके साथ हैं और हर संभव तरीके से उनकी सहायता करने का प्रयास करेंगे।

विपक्षी BJP पर हमला करते हुए सोरेन ने कहा कि झारखंड की स्थापना के 25 साल पूरे हो गए हैं, लेकिन इस अवधि में ज्यादातर समय उन लोगों ने शासन किया, जिन्होंने राज्य के गठन का विरोध किया था।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, झारखंड के गठन के बाद से अधिकांश समय तक राज्य पर शासन करने वाली BJP ने स्थिति को और खराब कर दिया। BJP ने 2014 के चुनावों के दौरान बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन्हें भूल गई।

इससे पहले, सोरेन ने 398 करोड़ रुपये से अधिक की 197 विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी और उनका उद्घाटन किया तथा लाभार्थियों को 637 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति वितरित की। उन्होंने जिले के 1,489 युवाओं को नियुक्ति पत्र भी सौंपे।

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