दृढ़ संकल्प की मिसाल : जब एक किसान ने फावड़े से खोद दी ‘सफलता की राह’

Jharkhand
फावड़े से खोद दी सफलता की राह
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झारखंड के बोकारो जिले में गणेश महतो नाम के एक किसान ने अपनी मेहनत और अटूट हौसले से एक ऐसी मिसाल कायम की है, जो पूरे देश के लिए प्रेरणा बन गई है । जब सिंचाई की व्यवस्था खत्म होने से उनकी खेती पर संकट आया, तो सरकारी मदद का इंतजार करने के बजाय उन्होंने खुद ही अपनी तकदीर लिखने का फैसला किया ।

संघर्ष और साधना का 6 महीने का सफर

दिसंबर 2025 में, गणेश महतो ने अकेले ही कुआं खोदने का संकल्प लिया। आर्थिक तंगी के चलते उनके पास ईंट-सीमेंट के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे, लेकिन उनका हौसला डिगा नहीं। उन्होंने मिट्टी के गारे से कुएं की चिनाई की और शारीरिक थकान व भीषण परिस्थितियों के बावजूद 6 महीने की निरंतर मेहनत से 29 फीट गहरा कुआं खोदकर तैयार कर दिया।

जन-भागीदारी का अद्भुत उदाहरण

गणेश के इस जुनून ने गांव वालों को भी प्रेरित किया। जब लोगों ने उन्हें अकेले मेहनत करते देखा, तो उनकी मदद के लिए हाथ आगे आए। किसी ने लोहे की छड़ें दीं, तो किसी ने श्रमदान किया। ग्रामीणों का मानना है कि उन्होंने ऐसा जज्बा पहले कभी नहीं देखा।

प्रशासन की सक्रियता

गणेश महतो की यह कहानी अब शासन-प्रशासन तक भी पहुँच चुकी है। बोकारो के उपायुक्त अजय नाथ झा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय अधिकारियों को जाँच के आदेश दिए हैं। भले ही मनरेगा जैसी योजनाओं का लाभ उन तक समय पर नहीं पहुँचा, लेकिन गणेश की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और आत्मनिर्भरता ही सबसे बड़ी ताकत है।

निष्कर्ष

गणेश महतो की यह कहानी महज एक कुएं के निर्माण की नहीं, बल्कि उस जिद की है जो अभावों को अवसर में बदल देती है। उन्होंने न केवल अपने खेतों को सींचा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए ‘आत्मनिर्भरता’ का एक जीता-जागता उदाहरण छोड़ दिया है।

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