

रांची : झारखंड के हजारीबाग में 12 साल की लड़की के साथ कथित दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या के मामले में राज्य सरकार ने शुक्रवार को हाई कोर्ट में सीलबंद जांच रिपोर्ट जमा की।
आरोप है कि कुसुम्भा गांव में एक बलि अनुष्ठान के दौरान एक तांत्रिक ने लड़की की मां की मदद से उसका गला घोंट दिया।
न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की पीठ पिछले महीने बच्ची की मौत के संबंध में मीडिया में आई खबरों के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दायर कर सुनवाई शुरू की।
पुलिस द्वारा की गई जांच, मृतक के कपड़ों की जांच, फोरेंसिक प्रयोगशाला की जांच और अपराध स्थल से बरामद सुराग के संबंध में एक रिपोर्ट अदालत में पेश की गई। पीठ ने रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद मामले की विस्तृत सुनवाई के लिए 11 मई की तारीख तय की।
अधिवक्ता हेमंत कुमार शिकारवार ने पीठ को सूचित किया कि पीड़ित की मां एक ईंट भट्ठे पर बतौर दिहाड़ी मजदूर काम करती है और उसे सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की धमकी दी जा रही है।
मामले की संवेदनशीलता और लड़की के निजी अंगों में लगी चोटों के मद्देनजर हाई कोर्ट ने मामले का गंभीरता से संज्ञान लिया और हजारीबाग के पुलिस अधीक्षक को जांच की निगरानी करने का निर्देश दिया।
पुलिस ने मामले में पीड़िता की मां रेशमी देवी (35), तांत्रिक शांति देवी (55) और 40 वर्षीय भीम राम को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के मुताबिक, रेशमी देवी अक्सर अपने सबसे छोटे बेटे के इलाज के लिए अपने गांव में एक तांत्रिक के पास जाती थी। उसने बताया कि रेशमी देवी का बेटा मानसिक और शारीरिक समस्याओं से ग्रस्त है।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘तांत्रिक ने मां से कहा कि बेटे की सभी बीमारियों को ठीक करने के लिए उसे एक कुंवारी लड़की की बलि देनी होगी।’
अधिकारी ने बताया था कि 24 मार्च को जब पूरा गांव राम नवमी के उत्सव में डूबा हुआ था, तब तांत्रिक शांति देवी के घर में लड़की का गला कथित तौर पर उसकी अपनी मां ने भीम राम के साथ मिलकर घोंट दिया।
पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने लड़की के शव को एक बगीचे में दफना दिया। इससे पहले, लड़की की मां ने बताया था कि उसकी बेटी का अपहरण कर लिया गया था। लड़की का शव 25 मार्च को एक खेत में मिला था।
राज्य की मुख्य विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने हत्या के विरोध में सोमवार को हजारीबाग में 12 घंटे का बंद आयोजित किया।