डंबूर हाइड्रो प्लांट के आधुनिकीकरण पर 100 करोड़ खर्च करेगा त्रिपुरा

डंबूर हाइड्रो प्लांट के आधुनिकीकरण पर 100 करोड़ खर्च करेगा त्रिपुरा

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2024 की बाढ़ में हुआ था भारी नुकसान, दिसंबर 2026 तक काम शुरू होने की उम्मीद

अगरतला :

त्रिपुरा सरकार गोमती जिले के डंबूर में स्थित राज्य के एकमात्र जलविद्युत संयंत्र को फिर से चालू करने और उसकी उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए करीब 100 करोड़ रुपये खर्च करेगी। नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन (NHPC) और राज्य सरकार ने संयंत्र की मरम्मत तथा आधुनिकीकरण की जरूरतों का आकलन करने के लिए तकनीकी जांच पूरी कर ली है। परियोजना पर दिसंबर 2026 तक काम शुरू होने की उम्मीद है। राज्य के बिजली मंत्री रतन लाल नाथ ने संयंत्र के मरम्मत एवं आधुनिकीकरण परियोजना के शिलान्यास समारोह में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 2024 में आई बाढ़ के कारण डंबूर जलविद्युत संयंत्र को भारी नुकसान पहुंचा था। इसके बाद से संयंत्र की स्थिति सुधारने और बिजली उत्पादन दोबारा शुरू करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।

10 से 11 मेगावाट उत्पादन का लक्ष्य

राज्य सरकार की योजना संयंत्र की तीन इकाइयों के माध्यम से 10 से 11 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता बहाल करने की है। संयंत्र की मूल स्थापित क्षमता 15 मेगावाट थी। मरम्मत और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से इसकी परिचालन क्षमता में सुधार होने की उम्मीद है। हालांकि, प्रस्तावित उत्पादन क्षमता मूल क्षमता से कम रहेगी। NHPC के साथ तकनीकी आकलन पूरा होने के बाद अब परियोजना को आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। करीब 100 करोड़ रुपये का निवेश संयंत्र की क्षतिग्रस्त व्यवस्था को दुरुस्त करने और उसके संचालन को बेहतर बनाने पर खर्च किया जाएगा।

नवीकरणीय ऊर्जा को मिलेगा बढ़ावा

डंबूर परियोजना का पुनरुद्धार त्रिपुरा के बिजली ढांचे को आधुनिक बनाने और नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। जलविद्युत ऊर्जा, गैस आधारित बिजली उत्पादन के मुकाबले ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने में मदद कर सकती है।त्रिपुरा बिजली उत्पादन के मामले में अतिरिक्त क्षमता वाला राज्य है और यहां बिजली की आपूर्ति में गैस आधारित टरबाइन संयंत्रों की प्रमुख भूमिका है। ऐसे में डंबूर जलविद्युत परियोजना को फिर से चालू करने से राज्य के ऊर्जा संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा। सरकार को उम्मीद है कि आधुनिकीकरण के बाद यह संयंत्र राज्य की बिजली व्यवस्था में फिर से योगदान देने लगेगा।
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