करम पर्व असम की समृद्ध लोक संस्कृति की जीवंत झलक : हिमंत

करम पर्व असम की समृद्ध लोक संस्कृति की जीवंत झलक : हिमंत

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गुवाहाटी :

असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने मंगलवार को करम पूजा के अवसर पर राज्य के चाय बागान श्रमिक समुदाय और प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि करम पर्व प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, समृद्धि और भाईचारे की भावना का संदेश देने वाला महत्वपूर्ण पारंपरिक त्योहार है और यह असम की समृद्ध लोक संस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत करता है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में कहा कि करम पूजा चाय बागान श्रमिक समुदाय की लोक परंपराओं, आस्था और सांस्कृतिक विरासत से गहराई से जुड़ा पवित्र अनुष्ठान है। उन्होंने कहा कि इस पर्व के दौरान पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य के माध्यम से समुदाय की सांस्कृतिक पहचान और सामुदायिक एकजुटता की अभिव्यक्ति होती है। शर्मा ने कहा कि ढोल-मृदंग की थाप और झूमर की लय करम पूजा के उत्सव को विशेष रूप से जीवंत बना देती है। उनके मुताबिक, यह पर्व असम की विविधतापूर्ण लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत की समृद्धि को सामने लाता है। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा, ‘‘करम पूजा के पावन अवसर पर मैं चाय बागान श्रमिक समुदाय के सभी भाई-बहनों और असम के सभी लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।’’

प्रकृति और समृद्धि से जुड़ा पर्व

करम पूजा असम के चाय बागान क्षेत्रों में रहने वाले श्रमिक समुदाय के प्रमुख पारंपरिक त्योहारों में से एक है। यह पर्व मुख्य रूप से भादो महीने, यानी अगस्त-सितंबर के दौरान मनाया जाता है। करम पर्व को प्रकृति, कृषि, फसल और सामुदायिक समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। इस अवसर पर करम वृक्ष की पूजा की जाती है और प्रकृति के प्रति सम्मान एवं आभार व्यक्त किया जाता है। समुदाय के लोग पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना करते हैं तथा सामूहिक रूप से गीत, संगीत और नृत्य में हिस्सा लेते हैं।

लोकगीत और झूमर नृत्य प्रमुख आकर्षण

करम पूजा के दौरान पारंपरिक झूमर गीत और नृत्य उत्सव का प्रमुख हिस्सा होते हैं। महिला और पुरुष पारंपरिक परिधानों में सामूहिक रूप से नृत्य करते हैं और ढोल-मांदर जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन पर लोकगीत प्रस्तुत किए जाते हैं। यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समुदाय के लोगों को एक साथ जोड़ने और अपनी सांस्कृतिक परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम भी बनता है।

चाय बागान समुदाय की सांस्कृतिक पहचान

असम के चाय बागान श्रमिक समुदाय की अपनी विशिष्ट लोक परंपराएं हैं, जिनमें विभिन्न त्योहार, लोकगीत, नृत्य और सामुदायिक अनुष्ठान शामिल हैं। करम पूजा इसी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में इसी सांस्कृतिक विविधता और परंपरा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि करम पर्व राज्य की लोक संस्कृति को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने लोगों से प्रकृति के प्रति सम्मान, आपसी भाईचारे और सामुदायिक एकता की भावना को मजबूत करने का भी संदेश दिया।
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