असम विधानसभा से बोडो भाषा हटाने का फैसला नहीं

असम विधानसभा से बोडो भाषा हटाने का फैसला नहीं

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सचिवालय ने मरम्मत कार्य को लेकर फैली अफवाहों का किया खंडन

भाषा को हटाने की खबरों पर दी सफाई

गुवाहाटी:

असम विधानसभा भवन के मुख्य प्रवेश द्वार से बोडो भाषा में लिखे नाम को हटाए जाने को लेकर उठे विवाद के बीच विधानसभा सचिवालय ने स्पष्ट किया है कि बोडो भाषा को हटाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। शनिवार, 17 अक्टूबर को विधानसभा सचिवालय ने इस संबंध में सामने आई मीडिया रिपोर्टों को निराधार बताया। सचिव राजीव भट्टाचार्य ने कहा कि विधानसभा भवन के सामने वाले हिस्से में मरम्मत का काम कराया गया था, जिसके कारण यह भ्रम पैदा हुआ।सचिवालय की ओर से जारी स्पष्टीकरण के अनुसार, विधानसभा भवन के अग्रभाग पर मरम्मत कार्य के दौरान हुई गतिविधियों को बोडो भाषा के शिलालेख को हटाने से जोड़कर देखा गया। सचिवालय ने कहा कि बोडो भाषा को हटाने के लिए न तो कोई फैसला किया गया है और न ही इस दिशा में कोई कदम उठाया गया है।विधानसभा भवन के मुख्य अग्रभाग पर असमिया, बोडो और अंग्रेजी भाषाओं में ‘असम विधानसभा’ लिखा हुआ है। इस शिलालेख को लेकर उठे विवाद के बाद सचिवालय ने स्थिति स्पष्ट करते हुए लोगों से अपुष्ट खबरों के आधार पर निष्कर्ष नहीं निकालने का संदेश दिया।

बोडो संगठनों ने जताया था विरोध

इससे पहले बोडो भाषा में लिखे नाम को हटाए जाने की खबरों पर बोडो समुदाय के नेताओं और संगठनों ने नाराजगी जताई थी। अखिल बोडो छात्र संघ (एबीएसयू) ने 16 अक्टूबर को इस घटनाक्रम की आलोचना करते हुए इसे भाषा और समुदाय की पहचान से जुड़ा मुद्दा बताया था। संगठन ने चेतावनी दी थी कि यदि बोडो भाषा के प्रति कथित उपेक्षा जारी रही, तो अलग बोडोलैंड राज्य की मांग को लेकर आंदोलन फिर से तेज हो सकता है।इस मुद्दे पर अन्य छात्र संगठनों ने भी विरोध प्रदर्शन किया था और सरकार से स्थिति स्पष्ट करने तथा बोडो भाषा के शिलालेख को बहाल करने की मांग उठाई थी। इससे कोकराझार सहित बोडोलैंड क्षेत्र में भाषा की मान्यता और सम्मान को लेकर बहस तेज हो गई थी।

असम में बोडो भाषा को संवैधानिक मान्यता

बोडो भाषा भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल है। असम में भी इसे सह-राजकीय भाषा का दर्जा प्राप्त है। विधानसभा में भाषाओं के इस्तेमाल को लेकर जुलाई 2026 में हिंदी को भी शामिल करने की घोषणा हुई थी। उस समय मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने स्पष्ट किया था कि असमिया, अंग्रेजी और बोडो का इस्तेमाल जारी रहेगा।वर्तमान विवाद पर विधानसभा सचिवालय के स्पष्टीकरण से यह स्पष्ट किया गया है कि बोडो भाषा को भवन के अग्रभाग से हटाने का कोई आधिकारिक निर्णय नहीं हुआ है। अब मरम्मत कार्य और शिलालेख से संबंधित स्थिति पर आगे की कार्रवाई के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि समुदाय की चिंताओं का समाधान किस तरह किया जाता है।
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